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Nag Panchami 2026: Kab Hai Nag Panchami? Puja Date, Shubh Muhurat aur Vidhi

नाग पंचमी 2026 कब है? जानिए सही तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कालसर्प दोष निवारण के उपाय। पढ़ें पूरी जानकारी।
15 August 2026 by
Nag Panchami 2026: Kab Hai Nag Panchami? Puja Date, Shubh Muhurat aur Vidhi
Ajeet Verma


Nag Panchami 2026: साक्षात शिव के आभूषण नाग देवता की आराधना का महापर्व, जानिए तिथि, मुहूर्त और अचूक उपाय

सावन का महीना चल रहा है और चारों तरफ हरियाली, शिव भक्ति और शंख-घंटियों की गूंज से वातावरण पूरी तरह से ऊर्जावान हो चुका है। ऐसे में सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का विशेष आध्यात्मिक महत्व है, जिसे हम 'नाग पंचमी' के रूप में मनाते हैं। सनातन संस्कृति में नागों को केवल जीव नहीं, बल्कि देव तुल्य और जगत के पालनहार भगवान शिव का आभूषण माना गया है।

वैदिक ज्योतिष के दृष्टिकोण से देखा जाए, तो इस दिन नाग देवता की पूजा करने से न केवल जीवन के कई संकट दूर होते हैं, बल्कि कुंडली के दुर्योगों से भी मुक्ति मिलती है। यदि आप भी अपने जीवन में सुख-शांति और सुरक्षा चाहते हैं, तो नाग पंचमी का यह पावन पर्व आपके लिए विशेष फलदायी साबित हो सकता है। आइए, एक अनुभवी ज्योतिषी के दृष्टिकोण से जानते हैं नाग पंचमी 2026 की सटीक तारीख, पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और इसके ज्योतिषीय महत्व को विस्तार से।

नाग पंचमी 2026 की तिथि और पंचांग विवरण

पंचांगीय गणना के अनुसार, हर साल सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है। वर्ष 2026 में यह तिथि कब पड़ रही है, इसका सटीक विवरण नीचे पंचांग तालिका में दिया गया है:

पंचांग विवरणविवरण (Details)
पर्व का नामनाग पंचमी 2026 (Nag Panchami 2026)
मास एवं पक्षसावन मास, शुक्ल पक्ष
तिथि प्रारंभपंचांग के अनुसार तिथि आरंभ
तिथि समाप्तपंचांग के अनुसार तिथि समापन
मुख्य पूजा तिथिनिश्चित सावन शुक्ल पंचमी 2026

नाग पंचमी पूजा का शुभ मुहूर्त

ज्योतिष शास्त्र में किसी भी अनुष्ठान और पूजा की पूर्ण सफलता के लिए सही समय यानी शुभ मुहूर्त का चयन करना बेहद जरूरी माना गया है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा के लिए निम्नलिखित मुहूर्त सबसे उत्तम माने गए हैं:

  • पूजा की कुल अवधि: लगभग 2 घंटे 30 मिनट से अधिक का प्रातूर काल मुहूर्त।

  • विशेष सलाह: ज्योतिषीय नियमों के अनुसार, नाग पंचमी की पूजा हमेशा सूर्योदय के पश्चात और प्रातकाल के स्थिर लग्नों में करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है, जिससे घर में नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश रुकता है और सकारात्मकता बढ़ती है।

नाग पंचमी का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व

हमारे प्राचीन ग्रंथों और शास्त्रों में नागों की महिमा का गुणगान करते हुए कहा गया है कि नाग देवता पाताल लोक के स्वामी और पृथ्वी को स्थिरता प्रदान करने वाले बल हैं। भगवान श्री कृष्ण के जीवन से लेकर भगवान शिव की जटाओं तक, नागों का सान्निध्य इस बात का प्रतीक है कि प्रकृति और जीवों के बीच संतुलन कितना आवश्यक है।

ज्योतिषीय दृष्टिकोण से नाग पंचमी का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि:

  1. कालसर्प दोष निवारण: जिन जातकों की जन्म कुंडली में राहु-केतु के मध्य सभी ग्रह आ जाने के कारण 'कालसर्प दोष' बनता है, उनके लिए नाग पंचमी का दिन इस दोष के नकारात्मक प्रभावों को शांत करने का सबसे बड़ा अवसर होता है।

  2. सर्प दोष से मुक्ति: कुंडली में नाग श्राप या सर्प दोष होने पर जीवन में आकस्मिक बाधाएं, करियर में रुकावटें और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बनी रहती हैं। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से इन बाधाओं का शमन होता है।

  3. पारिवारिक सुरक्षा: ऐसी मान्यता है कि नाग पंचमी के दिन सच्चे मन से नाग देवता की पूजा करने से साधक के पूरे परिवार को सर्प भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि का वास होता है।

नाग पंचमी की संपूर्ण पूजा विधि

एक ज्योतिषीय आचार्य के रूप में मेरा हमेशा यह सुझाव रहता है कि कोई भी अनुष्ठान यदि पूरी श्रद्धा, नियम और सही विधि से किया जाए, तो उसका फल शत-प्रतिशत प्राप्त होता है। नाग पंचमी के दिन आपको इस प्रकार पूजा करनी चाहिए:

  • प्रातः स्नानादि से निवृत्त होना: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र धारण करें। इसके बाद व्रत और पूजा का संकल्प लें।

  • पूजा स्थल की शुद्धि: अपने घर के पूजा घर को अच्छी तरह साफ करें और गंगाजल छिड़ककर पवित्र करें।

  • नाग देवता के स्वरूप की स्थापना: दीवार पर गोबर या गेरू से नाग देवता के नौ स्वरूपों (अनंत, वासुकी, शेष, पद्म, कम्बल, कर्कोटक, अश्वतर, धृतराष्ट्र और शंखपाल) का चित्र बनाएं या फिर चांदी, तांबे अथवा तस्वीर रूप में नाग देवता को स्थापित करें।

  • षोडशोपचार पूजन: नाग देवता को हल्दी, रोली, अक्षत (चावत), पुष्प और विशेष रूप से दुर्वा अर्पित करें।

  • नैवेद्य और दूध का भोग: नाग देवता को कच्चे दूध, घी, शक्कर और मिष्ठान का भोग लगाएं। कई स्थानों पर इस दिन सेवई और खीर का प्रसाद भी विशेष रूप से चढ़ाया जाता है।

  • मंत्र जाप: पूजा के दौरान नाग देवताओं के बीज मंत्रों का कम से कम एक माला जाप अवश्य करें।

कालसर्प दोष शांति के लिए अचूक ज्योतिषीय उपाय

यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है और आप जीवन में लगातार संघर्ष कर रहे हैं, तो नाग पंचमी के दिन निम्नलिखित उपाय जरूर आजमाएं:

  • चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा: किसी सुयोग्य पंडित की देखरेख में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा बनवाकर उसका विधि-विधान से पूजन करें और उसे किसी शिव मंदिर में अर्पित करें या बहते जल में प्रवाहित करें।

  • रुद्राभिषेक: नाग पंचमी के दिन भगवान शिव का गन्ने के रस या शुद्ध जल से अभिषेक करवाएं और महामृत्युंजय मंत्र का सविधि जाप करें।

  • सपेरे को दान या जीवों की रक्षा: इस दिन किसी जरूरतमंद को अन्न-धन का दान दें और भूलकर भी किसी जीव या सर्प को कष्ट न पहुँचाएं, बल्कि उनकी रक्षा का संकल्प लें।

निष्कर्ष

नाग पंचमी का यह पावन पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि यह हमारी उस संस्कृति का हिस्सा है जो प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति प्रेम और सम्मान सिखाती है। जब हम नाग देवता की पूजा करते हैं, तो हम प्रत्यक्ष रूप से पर्यावरण संतुलन और सनातन आस्था के प्रति अपनी निष्ठा को दोहराते हैं। इस नाग पंचमी पर पूरी श्रद्धा और सकारात्मकता के साथ पूजा करें, निश्चित रूप से नाग देवता और महादेव की कृपा आपके जीवन के समस्त कष्टों को दूर कर सुख और समृद्धि के मार्ग प्रशस्त करेगी।

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