
अक्सर ऐसा होता है कि ज्योतिषीय रूप से सही गोचर, शुभ दशा, अच्छा मुहूर्त सब कुछ होने के बाद भी काम अंतिम समय पर बिगड़ जाता है, डील टूट जाती है, रिश्ता रुक जाता है या जॉब ऑफर रिस्यूम तक ही सीमित रह जाता है। यह स्थिति केवल “भाग्य खराब” होने की नहीं बल्कि कुंडली के भीतर छिपे विरोधाभासी योगों, ग्रहों की आपसी लड़ाई, द्वादश (12वें) भाव में व्यय योग, और राहु-केतु की सूक्ष्म बाधाओं का परिणाम है। कई बार नवां भाव (भाग्य भाव) मजबूत होने के बावजूद दसवां भाव (कर्म भाव) या ग्यारहवां भाव (लाभ भाव) में ऐसा दोष बैठा होता है जो सही समय पर भी काम बनने नहीं देता।
मुख्य ज्योतिषीय कारण: “योग है लेकिन फल नहीं”
विपरीत दिशाओं में ग्रह बल (काउंटर प्रॉमिस)
द्वादश भाव और व्ययेश की बाधा
बारहवां भाव और उसका स्वामी यदि मजबूत होकर अशुभ ग्रहों से जुड़ जाए तो “अंतिम समय की हानि” देता है; सब तैयार, बस साइन से पहले डील टूट जाती है।
व्ययेश की दशा/अंतर्दशा में शुरू की गई चीज़ें अक्सर अधूरी रह जाती हैं या पूरा लाभ नहीं देतीं।
राहु का माया जाल और झूठा योग
राहु शुभ भाव में बैठकर “सुपर गोल्डन टाइम” जैसा भ्रम देता है, लेकिन अंदर से काम में कानूनी, तकनीकी या छुपी रुकावटें पैदा कर देता है।
खास कर जब राहु 3, 6, 10, 11 में हो और दशा भी उसकी चल रही हो तो दिखता सब पॉज़िटिव है पर रिज़ल्ट में ट्विस्ट आता है।
मुहूर्त सही, लेकिन जन्मकुंडली/दशा सपोर्ट में नहीं
केवल अच्छा मुहूर्त चुन लेने से काम नहीं बनता, जब तक कि आपकी चालू दशा और गोचर उस काम की प्रकृति को सपोर्ट न करें; शादी के लिए शादीयोगी दशा, जॉब के लिए कर्मेश‑समर्थ दशा ज़रूरी है।
कई बार मुहूर्त शास्त्र से चुना “शुभ समय” जन्मकुंडली से टकरा जाता है, परिणाम—बार‑बार कैंसल या पोस्टपोन।
कर्म भाव और लाभ भाव में छुपे शत्रु योग
दसवां भाव या ग्यारहवां भाव यदि षष्ठ (शत्रु), अष्टम (रुकावट) या द्वादश (हानि) से जुड़े हों तो “अंतिम समय पर विरोधी या नियम” सामने आकर काम बिगाड़ देते हैं।
शनि/केतु की दृष्टि होने पर मेहनत और समय ठीक होते हुए भी सिस्टम, नियम, पेपरवर्क या सीनियर के कारण काम फेल हो जाता है।
कौन‑कौन से भाव और ग्रह सबसे ज़्यादा जिम्मेदार होते हैं?
| क्षेत्र | संबंधित भाव | मुख्य ग्रह | खराब होने पर प्रभाव |
|---|---|---|---|
| टाइमिंग सही लेकिन रिज़ल्ट नहीं | 9वां, 10वां, 11वां | गुरु, शनि, राहु | सही समय पर भी काम नहीं बनता |
| आखिरी मिनट कैंसलेशन | 8वां, 12वां | केतु, शनि | अचानक रुकावट, दुर्घटना, कैंसल |
| कागज़ी/लीगल रुकावट | 6वां, 10वां | शनि, मंगल | फाइल अटकना, वेरिफिकेशन में समस्या |
| रिश्ते/शादी अटकना | 7वां, 11वां | शुक्र, राहु | बार‑बार बात बनकर टूटना |
इन भावों पर आपने पहले ही डिटेल आर्टिकल बना रखे हैं, जैसे नवां, दसवां, ग्यारहवां और बारहवां भाव; इन्हीं के इंटरलिंक से इस नए ब्लॉग की इंटरनल लिंकिंग बहुत स्ट्रॉन्ग हो सकती है।
45 दिनों की “काम बनवाओ” ज्योतिष साधना
1. सही समय + सही ग्रह सपोर्ट एक्टिव करना
जिस काम के लिए जा रहे हैं, उससे जुड़े भाव का आर्टिकल पहले पढ़ें (जैसे करियर के लिए 10वां, शादी के लिए 7वां, प्रॉपर्टी के लिए 4था)।
उस भाव के स्वामी ग्रह का मंत्र और उपाय कम से कम 21 दिन पहले से शुरू करें—जैसे
करियर/प्रमोशन: शनि/मंगल मंत्र + शनि उपाय।
विवाह: शुक्र/गुरु मंत्र।
धन/डील: शुक्र + गुरु कॉम्बो साधना।
2. राहु‑केतु की सूक्ष्म बाधा हटाना
मंगलवार/शनिवार को काले तिल, काले कपड़े में बांधकर बहते पानी में प्रवाहित करें; राहु‑केतु के कारण होने वाला “अंतिम समय का ट्विस्ट” काफी हद तक न्यूट्रल हो जाता है।
“ॐ राहवे नमः” और “ॐ केतवे नमः” – 108 जप रोज़ रात को 10–15 मिनट के लिए करें; इससे छुपे शत्रु, गुप्त रुकावटें और लीगल बाधाएं कम होती हैं।
3. व्ययेश और 12वें भाव को पॉज़िटिव बनाना
बारहवें भाव से जुड़ी सबसे बड़ी कुंजी है—दान और त्याग; जिस दिन बड़ा काम हो, उससे 1–2 दिन पहले गुप्त दान करें (नाम बिना बताए)।
रात में सोने से पहले 5 मिनट “ॐ नमः शिवाय” जप; ये 12वें भाव के अशुभ फल को मोक्ष की दिशा में बदल देता है, जिससे हानि की जगह आध्यात्मिक प्रोटेक्शन मिलती है।
प्रैक्टिकल मंत्र सेट – किसी भी काम से पहले
काम का “सही समय” आने के बाद भी ये छोटा सा सेट रोज़ 15–20 मिनट करने से रिज़ल्ट में फर्क स्पष्ट दिखता है:
ॐ गं गणपतये नमः – 108 बार (हर नई शुरुआत से पहले बाधा नाश के लिए)।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय – 21 बार (सही दिशा और सही निर्णय के लिए)।
संबंधित ग्रह मंत्र – जैसे
करियर: “ॐ शं शनैश्चराय नमः” या “ॐ भौमाय नमः”।
विवाह/रिलेशनशिप: “ॐ शुक्राय नमः”।
धन/डील: “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः”।
इन मंत्रों में शनि, गुरु, शुक्र, राहु जैसे मुख्य ग्रहों की ऊर्जा एक्टिव होती है, जिनके बारे में आपने पहले ही डीप आर्टिकल लिखे हैं—जैसे गुरु ग्रह, शुक्र ग्रह आदि।