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हर नौकरी में मन क्यों नहीं लगता? वैदिक ज्योतिष में कारण, गहन विश्लेषण

शनि ग्रह कर्म का स्वामी है लेकिन अस्थिर शनि नौकरी बदलवाता है जबकि राहु ग्रह भ्रम पैदा करता है। हर नौकरी में मन न लगना
25 December 2025 by
हर नौकरी में मन क्यों नहीं लगता? वैदिक ज्योतिष में कारण, गहन विश्लेषण
Skill Astro

शनि ग्रह कर्म का स्वामी है लेकिन अस्थिर शनि नौकरी बदलवाता है जबकि राहु ग्रह भ्रम पैदा करता है। हर नौकरी में मन न लगना

सब कुछ सही चल रहा हो फिर भी हर नौकरी में मन न लगना सबसे निराशाजनक स्थिति है। अच्छी सैलरी है, बॉस खुश है, सहकर्मी अच्छे हैं - फिर भी नौकरी बदलने का मन करता है, बोरियत होती है, एक साल भी कहीं टिक नहीं पाते। यह ज्योतिषीय कर्म असंतोष का स्पष्ट संकेत है। वैदिक ज्योतिष में यह दसवां भाव में अस्थिरता, चंद्रमा की कमजोरी, राहु-केतु अक्ष की बाधा और शनि की अत्यधिक गतिशीलता से होता है। इस अत्यंत विस्तृत, गहन और व्यावहारिक लेख में हम 12 प्रमुख ज्योतिषीय कारण, उनके लक्षण, कुंडली पहचान और 45 दिनों में नौकरी स्थिरता लाने वाले तत्काल उपाय बताएंगे ताकि आपकी कैरियर फिर से स्थिर हो सके। शनि ग्रह कर्म का स्वामी है लेकिन अस्थिर शनि नौकरी बदलवाता है जबकि राहु ग्रह भ्रम पैदा करता है।

ज्योतिषीय विज्ञान: हर नौकरी में मन क्यों नहीं लगता?

वैदिक ज्योतिष में नौकरी स्थिरता शनि (कर्म) + चंद्रमा (मन) + गुरु (मार्गदर्शन) के संतुलन पर निर्भर करती है। जब चंद्रमा की मानसिक स्थिरता कमजोर पड़ती है और राहु की अस्थिरता हावी हो जाती है तो नौकरी में मन नहीं लगता। कुंडली के कर्म भाव (10) में अस्थिरता या लग्न में रुकावट कैरियर को स्टक कर देता है। राहु दशा, चंद्रमा का नीच होना या शनि का combust होना मुख्य कारण हैं। आइए 12 गहन कारणों को समझें।

12 प्रमुख ज्योतिषीय कारण और लक्षण

1. दसवें भाव की अत्यधिक अस्थिरता (सबसे बड़ा कारण)

वैदिक विश्लेषणदसवां भाव में राहु/केतु या कर्मेश 3/6/11 में।

लक्षण: हर 6-12 महीने में नौकरी बदलना, मन न लगना।

उदाहरण: मिथुन लग्न में बुध दसवें में राहु के साथ - कैरियर भ्रम।

2. चंद्रमा की मानसिक अस्थिरता (मन भटकना)

वैदिक विश्लेषणचंद्रमा नीच/कमजोर या राहु युक्त।

लक्षण: कार्यस्थल पर बोरियत, एक जगह टिक न पाना।

उदाहरण: चंद्रमा वृश्चिक में - मानसिक अशांति से नौकरी असंतोष।

3. राहु-केतु कर्म अक्ष बाधा (कैरियर भ्रम)

वैदिक विश्लेषण: राहु दसवें/लग्न में, केतु त्रिकोण में। राहु दशा।

लक्षण: नई नौकरी में excitement फिर बोरियत।

उदाहरण: राहु दसवें भाव में - हर नई नौकरी में भ्रम।

4. केंद्र भावों में कर्म असंतोष

वैदिक विश्लेषण: केंद्र भावों में चंद्रमा/राहु गोचर।

लक्षण: सभी क्षेत्रों में स्थिरता न मिलना।

कुंडली कर्म असंतोष तालिका

दोष प्रकारप्रभावित भावमुख्य ग्रहलक्षणउपाय
कर्म अस्थिरतादसवांशनिनौकरी बदलनाहनुमान चालीसा
मन भटकनालग्नचंद्रमाबोरियतचंद्र मंत्र
कैरियर भ्रमकेंद्र भावराहुगलत निर्णयगोमेद
मार्गदर्शन कमीनवांगुरुदिशा भ्रमपुखराज

तत्काल 45-दिन नौकरी स्थिरता साधना

शनि कर्म स्थिरता मंत्र (नौकरी टिकाने के लिए)

शनिवार सुबह 6 बजे:

सरसों तेल का दीपक। ॐ शं शनैश्चराय नमः - 108 बार। हनुमान चालीसा।

रत्न: नीलम (मध्यमा उंगली)।

परिणाम: 45 दिन में नौकरी में स्थिरता।

चंद्रमा मानसिक शांति साधना (मन स्थिर करने के लिए)

सोमवार रात्रि:

दूध + चंदन का दीपक। ॐ सों सोमाय नमः - 108 बार। शिवलिंग पर दूध।

रत्न: मोती (कनिष्ठिका उंगली)।

परिणाम: कार्यस्थल पर शांति।

राहु कर्म भ्रम शांति (भ्रम दूर करने के लिए)

मंगलवार सुबह:

ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः - 108 बार। गोमेद धारण।

दशा-गोचर आधारित उपाय

वर्तमान स्थिति45-दिन उपायपरिणाम
राहु दशादुर्गा सप्तशती + गोमेदकैरियर दिशा स्पष्ट
चंद्रमा नीचशिव पूजा + मोतीमन स्थिर
शनि ढैय्याहनुमान चालीसा + नीलमनौकरी स्थिर

दैनिक कर्म स्थिरता साधना (सुबह 6-7 AM)

पूर्ण विधि:

शनि मंत्र - 21x शनि ग्रह

चंद्र मंत्र - 21x।

ॐ गं गणपतये नमः - 108x।

शनिवार दान - उड़द।

परिणाम: 45 दिन में नौकरी स्थिर।

FAQ - महत्वपूर्ण प्रश्न

Q1: अच्छी नौकरी फिर भी क्यों बदलना चाहते हैं?

A: दसवां भाव में राहु। नीलम + हनुमान चालीसा।

Q2: बॉस अच्छा फिर भी मन क्यों नहीं लगता?

A: चंद्रमा कमजोर। मोती + शिव पूजा।

Q3: कब से नौकरी स्थिर होगी?

A: 45 दिन उपाय के बाद शनि गोचर।

Q4: कौन सा रत्न नौकरी के लिए?

A: शनि=नीलम, चंद्र=मोती।

Q5: हर नई नौकरी में शुरुआत अच्छी फिर बोरियत क्यों?

A: राहु दशा। गोमेद धारण करें।

निष्कर्ष और कर्म स्थिरता रोडमैप

नौकरी असंतोष + ज्योतिष साधना = कैरियर स्थिरता। दसवां भाव को स्थिर करें, चंद्रमा को शांत करें। 45 दिन साधना से 85% मामलों में नौकरी स्थिर। आज से प्रारंभ करें - कैरियर फिर स्थिर!

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