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Raksha Bandhan 2026 Date, Shubh Muhurat,Puja Vidhi

रक्षाबंधन 2026 कब है? 27 या 28 अगस्त की उलझन को दूर करें। जानें राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त, भद्रा काल का समय,
18 August 2026 by
Raksha Bandhan 2026 Date, Shubh Muhurat,Puja Vidhi
Vishnu Verma

Raksha Bandhan 2026 Date, Shubh Muhurat,Puja Vidhi | Skill Astro

रक्षाबंधन 2026: विश्वास और आत्मीयता का महापर्व

 एक ज्योतिषाचार्य के रूप में मैंने अपने जीवन में कई ग्रहों की चाल और नक्षत्रों के बदलते प्रभावों का अध्ययन किया है, लेकिन जब बात रक्षाबंधन की आती है, तो मुझे लगता है कि संसार का कोई भी ग्रह या खगोलीय घटना भाई-बहन के उस निश्छल प्रेम से अधिक शक्तिशाली नहीं हो सकती। रक्षाबंधन महज एक रेशमी धागे का त्योहार नहीं है; यह बचपन की मीठी यादों, प्यारी सी नोक-झोंक, एक-दूसरे के प्रति असीम समर्पण और बिना कुछ कहे एक-दूसरे की ढाल बन जाने के वादे का पवित्र प्रतीक है।

जब एक बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र (राखी) बांधती है, तो वह केवल एक धागा नहीं लपेटती, बल्कि अपने भाई की लंबी उम्र, उसकी सफलता और उत्तम स्वास्थ्य की प्रार्थना को उस धागे के हर रेशे में पिरो देती है। वहीं, एक भाई जब उस राखी को स्वीकार करता है, तो वह आजीवन अपनी बहन के सम्मान, सुरक्षा और खुशियों की रक्षा करने का मौन संकल्प लेता है।

साल 2026 में रक्षाबंधन की सही तारीख को लेकर लोगों के मन में कई सवाल हैं, विशेषकर 27 और 28 अगस्त की तारीखों के बीच एक उलझन बनी हुई है। तो आइए, आज मैं आपके इन सभी सवालों का उत्तर अत्यंत सरल और स्पष्ट भाषा में देता हूँ, ताकि आप इस पावन पर्व को बिना किसी मानसिक शंका के, पूरे विधि-विधान के साथ मना सकें।

27 या 28 अगस्त: कब है रक्षाबंधन 2026?

सनातन धर्म में हर साल सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को रक्षाबंधन का पावन पर्व मनाया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हमारे त्योहारों की तारीखें अंग्रेजी कैलेंडर की तरह रात 12 बजे नहीं बदलतीं, बल्कि सूर्योदय और चंद्रमा की स्थिति (तिथियों) के आधार पर तय होती हैं।

वर्ष 2026 में सावन पूर्णिमा की स्थिति कुछ इस प्रकार बन रही है:

  • पूर्णिमा तिथि का आरंभ: 27 अगस्त 2026, गुरुवार को सुबह 09:07 या 09:08 बजे से हो रहा है।

  • पूर्णिमा तिथि का समापन: 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को सुबह 09:48 या 09:49 बजे तक रहेगा।

ज्योतिष शास्त्र में 'उदया तिथि' (यानी सूर्योदय के समय जो तिथि विद्यमान हो) का विशेष महत्व माना गया है। चूँकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए शास्त्र सम्मत रूप से रक्षाबंधन का मुख्य पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन ही मनाया जाएगा

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 2026

शुभ मुहूर्त में किए गए कार्य हमेशा शुभ और फलदायी होते हैं। भाई-बहन के इस अटूट रिश्ते को और अधिक ऊर्जावान बनाने के लिए सही समय पर राखी बांधना बेहद जरूरी है। 28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे श्रेष्ठ समय सुबह के प्रहर में ही रहेगा।

विवरणशुभ समय
रक्षाबंधन का दिन28 अगस्त 2026, शुक्रवार
राखी बांधने का शुभ मुहूर्तसुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक
मुहूर्त की कुल अवधिलगभग 3 घंटे 51 मिनट

ध्यान दें: चूँकि 28 अगस्त को सुबह 09:48 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी, इसलिए मैं सभी बहनों को यह नेक सलाह दूँगा कि वे इसी शुभ समयावधि के भीतर अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांध लें। यह सकारात्मक समय आपके रिश्ते में नव-ऊर्जा का संचार करेगा।

भद्रा काल का साया: क्या इस बार भी है रुकावट?

अक्सर रक्षाबंधन के आते ही 'भद्रा काल' का डर हर किसी के मन में बैठ जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, भद्रा काल में कभी भी राखी नहीं बांधनी चाहिए, क्योंकि इसे शुभ और मांगलिक कार्यों के लिए वर्जित माना गया है। भद्रा को सूर्य देव की पुत्री और कर्मफल दाता शनि देव की बहन माना गया है, जिनका स्वभाव अत्यंत उग्र और क्रोधी है।

आपके लिए एक बहुत अच्छी और सुकून देने वाली खबर है!

वर्ष 2026 में, भद्रा का प्रभाव 27 अगस्त को सुबह 09:08 बजे से शुरू होकर रात 09:32 बजे तक ही रहेगा। इसका सीधा अर्थ यह है कि 28 अगस्त के दिन रक्षाबंधन पूरी तरह से भद्रा-मुक्त रहेगा। आपको और आपके परिवार को भद्रा के कारण तनिक भी परेशान होने या रात तक इंतजार करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी। आप सुबह की मंगल वेला में शांति और उत्साह से इस पर्व को मना सकते हैं।

राखी बांधने की सरल और सही पूजा विधि 

कई बार हम आडंबर और दिखावे के चक्कर में त्योहार के मूल आध्यात्मिक भाव को भूल जाते हैं। जबकि ईश्वर और ग्रह-नक्षत्र केवल हमारी सच्ची भावनाओं को समझते हैं। आइए जानते हैं राखी बांधने की सबसे सरल और शास्त्रोक्त विधि:

  1. थाली सजाएं: सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद एक साफ और सुंदर थाली लें। उसमें रोली (कुमकुम), अक्षत (साबुत और बिना टूटे हुए चावल), चंदन का लेप, घी का दीपक, कुछ ताज़ी मिठाइयां और सबसे जरूरी—प्रेम से लाई गई राखी रखें।

  2. दिशा का ध्यान: राखी बांधते समय भाई को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठाएं। यह दिशा देवताओं की दिशा मानी जाती है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

  3. तिलक और अक्षत: बहनें सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम और चंदन का पवित्र तिलक लगाएं और उस पर अक्षत (चावल) लगाएं। अक्षत पूर्णता, शांति और समृद्धि का प्रतीक है।

  4. दीपक जलाकर आरती करें: इसके बाद भाई की आरती उतारें। यह आरती भाई के आस-पास मौजूद नकारात्मक ऊर्जा और नजर दोष को दूर करने का कार्य करती है।

  5. राखी बांधें: भाई के दाहिने (Right) हाथ की कलाई पर रक्षासूत्र बांधते समय मन ही मन ईश्वर से उसकी सुख-समृद्धि, दीर्घायु और सदमार्ग पर चलने की प्रार्थना करें।

  6. मुंह मीठा और संकल्प: अंत में भाई का मुंह मीठा कराएं। इसके बाद भाई भी अपनी क्षमता और प्रेम के अनुसार बहन को स्नेहपूर्ण उपहार दे और जीवन के हर सुख-दुख में उसका साथ निभाने का संकल्प ले।

ज्योतिषीय दृष्टि से 2026 के रक्षाबंधन का विशेष महत्व

वर्ष 2026 का यह रक्षाबंधन खगोलीय और ज्योतिषीय दृष्टि से भी बहुत ही अद्भुत संयोग लेकर आ रहा है। इस दिन चंद्रमा मंगल के धनिष्ठा और शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव में गोचर करेगा। मंगल ग्रह को नवग्रहों में सेनापति, साहस और असीम ऊर्जा का कारक माना जाता है। यह प्रभाव भाई-बहनों के रिश्तों में किसी भी तरह के मानसिक मनमुटाव को दूर कर नई चेतना और सुरक्षा का भाव भरेगा।

वहीं, ग्रहों के राजा सूर्य अपनी ही स्वराशि 'सिंह' में मजबूती से विराजमान रहेंगे। यह गोचर भाई के भीतर आत्मविश्वास को मजबूत करेगा और समाज में बहन के आत्म-सम्मान और यश में वृद्धि करने वाला साबित होगा।

अंत में कुछ शब्द...

त्योहारों की भीड़-भाड़ और आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में, रक्षाबंधन वह खूबसूरत ठहराव है जो हमें हमारे अपनों की असली अहमियत याद दिलाता है। यदि आप मीलों दूर भी बैठे हैं, तो भी उदास न हों; एक फोन कॉल करके या वीडियो कॉल पर एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा देना भी किसी डिजिटल रक्षासूत्र से कम नहीं है। भावनाएं सर्वोपरि हैं, धागे तो केवल माध्यम हैं।

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