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गणेश चतुर्थी 2026: बप्पा की स्थापना का शुभ मुहूर्त

गणेश चतुर्थी 2026 (14 सितंबर) पर अपने घर में विघ्नहर्ता की स्थापना का सही शुभ मुहूर्त,
7 September 2026 by
Vishal Tiwari

गणेश चतुर्थी 2026: बप्पा की स्थापना का शुभ मुहूर्त | Skill Astro

गणेश चतुर्थी 2026: 

ॐ गं गणपतये नमः!

जैसे-जैसे भाद्रपद मास करीब आता है, हवाओं में एक अलग सी ही महक और मन में एक अजीब सा उल्लास छाने लगता है। विघ्नहर्ता के आगमन की आहट मात्र से ही घर का कोना-कोना सकारात्मक ऊर्जा से भर उठता है। हम सभी पूरे साल इस बात का इंतजार करते हैं कि कब हमारे प्यारे गजानन हमारे घर पधारेंगे और हमारे जीवन के सभी कष्टों को दूर करेंगे। अगर आप भी गणेश चतुर्थी 2026 की तैयारियों में जुटे हैं और चाहते हैं कि बप्पा की कृपा आपके परिवार पर पूरी तरह से बरसे, तो यह लेख आपके लिए ही है।

एक ज्योतिषी के नजरिए से, भगवान की पूजा में भाव का होना सबसे महत्वपूर्ण है, लेकिन शास्त्रों में बताए गए सही समय और विधि-विधान का पालन करने से उस पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है। आइए जानते हैं कि इस वर्ष बप्पा का स्वागत किस तरह और किस शुभ घड़ी में करना है।

गणेश चतुर्थी 2026 की सही तिथि और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग की गणना के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को श्री गणेश जी का जन्म हुआ था। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 14 सितंबर 2026 (सोमवार) को मनाया जाएगा।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, भगवान गणेश की स्थापना हमेशा 'मध्याह्न काल' (दोपहर के समय) में करनी चाहिए, क्योंकि गजानन का जन्म इसी प्रहर में हुआ था। ग्रहों की चाल और पंचांग को देखते हुए, अलग-अलग शहरों में सूर्योदय के अनुसार गणेश स्थापना शुभ मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर आ जाता है। नीचे दी गई तालिका में आप अपने शहर के अनुसार स्थापना का सटीक समय देख सकते हैं:

शहरगणेश स्थापना मुहूर्त (14 सितंबर 2026)
नई दिल्लीसुबह 11:02 से दोपहर 01:31 तक
मुंबईसुबह 11:20 से दोपहर 01:48 तक
पुणेसुबह 11:16 से दोपहर 01:44 तक
कोलकातासुबह 10:18 से दोपहर 12:46 तक

(ध्यान दें: मूर्ति स्थापना का यह समय स्थिर लग्न और शुभ चौघड़िया को ध्यान में रखकर निकाला गया है। प्रयास करें कि इसी अवधि में बप्पा अपने आसन पर विराजमान हो जाएं।)

गणेश स्थापना के लिए आवश्यक पूजन सामग्री की लिस्ट

बाजार जाने से पहले इस सूची का स्क्रीनशॉट जरूर ले लें, ताकि पूजा के समय कोई भी महत्वपूर्ण वस्तु छूट न जाए। जब आप पूरे मन और पूर्ण सामग्री के साथ पूजा करते हैं, तो भगवान भी आपकी पुकार जल्दी सुनते हैं।

  • भगवान गणेश की मूर्ति: हमेशा मिट्टी से बनी  मूर्ति ही लाएं। प्रकृति का सम्मान करना ही बप्पा की सबसे पहली वंदना है।

  • आसन और वस्त्र: एक साफ लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए नया लाल या पीला सूती कपड़ा।

  • पवित्र जल: गंगाजल, एक तांबे का कलश और 5 या 7 आम के ताजे पत्ते।

  • तिलक व शृंगार: बिना टूटा हुआ चावल (अक्षत), रोली, कुमकुम, पिसी हुई हल्दी, चंदन और मौली (कलावा)।

  • पूजन सामग्री: साबुत सुपारी, जनेऊ, लाल गुड़हल के फूल (गजानन को अति प्रिय), और ताजी दूर्वा घास (21 गांठे)।

  • नैवेद्य (प्रसाद): मोदक, बेसन या मोतीचूर के लड्डू, पंचमेवा (पांच तरह के सूखे मेवे), और मौसमी ऋतुफल।

घर पर बप्पा की स्थापना और पूजा की सरल विधि

कई लोग सोचते हैं कि घर पर प्राण-प्रतिष्ठा या स्थापना करना बहुत कठिन है, लेकिन ऐसा नहीं है। ईश्वर केवल आपके सच्चे भाव के भूखे हैं। आप इस सरल और शास्त्र सम्मत विधि से खुद बप्पा की मूर्ति स्थापना कर सकते हैं:

  1. चौकी तैयार करना: स्नान आदि के बाद साफ वस्त्र धारण करें। घर के ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) या पूजा घर में लकड़ी की चौकी रखें। इस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और थोड़े से अक्षत (चावल) रखकर भगवान का ध्यान करें।

  2. कलश स्थापना: चौकी के दाईं ओर तांबे के कलश में शुद्ध जल और गंगाजल भरें। कलश के अंदर एक सिक्का, सुपारी और थोड़ी हल्दी डालें। अब कलश के मुख पर आम के पत्ते रखकर उस पर नारियल स्थापित करें।

  3. मूर्ति स्थापना: शुभ मुहूर्त के दौरान भगवान गणेश की मूर्ति को आदरपूर्वक उठाएं और चौकी पर विराजमान करें। स्थापना करते समय मन में यह भाव लाएं कि साक्षात गजानन आपके घर पधारे हैं।

  4. पूजा और मंत्र: बप्पा को गंगाजल से प्रतीकात्मक स्नान कराएं (फूल से जल छिड़कें)। इसके बाद उन्हें पीले वस्त्र, जनेऊ, और सिंदूर का तिलक लगाएं। उन्हें लाल गुड़हल के फूल और 21 दूर्वा की गांठे अर्पित करें। इस पूरी प्रक्रिया के दौरान "ॐ गं गणपतये नमः" मंत्र का निरंतर जाप करते रहें।

  5. भोग और आरती: गणेश जी को मोदक और लड्डू का भोग लगाएं। अंत में घी का दीपक या कपूर जलाकर पूरे परिवार के साथ भगवान गणेश की आरती करें और उनसे अपने घर में सुख-शांति बनाए रखने की प्रार्थना करें।

गणेश विसर्जन 2026 की तिथि

बप्पा जितने उल्लास के साथ आते हैं, विदाई के समय आंखें उतनी ही नम कर जाते हैं। 10 दिनों तक चलने वाले इस गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है। वर्ष 2026 में गणेश विसर्जन 25 सितंबर 2026, शुक्रवार के दिन किया जाएगा। विसर्जन पर ले जाने से पहले बप्पा की एक छोटी सी विदाई पूजा जरूर करें, उन्हें दही-चीनी का भोग लगाएं और अगले बरस जल्दी आने का वचन लें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

Q: 2026 में गणेश चतुर्थी कब है?

A: वर्ष 2026 में गणेश चतुर्थी का पावन पर्व 14 सितंबर, सोमवार के दिन पूरे देशभर में धूमधाम से मनाया जाएगा।

Q: गणेश जी को कितनी दूर्वा चढ़ानी चाहिए?

A: भगवान गणेश को 21 दूर्वा (घास) की गांठे चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, दूर्वा जीवन में हरियाली, शांति और आरोग्य का प्रतीक है जो बप्पा को अत्यंत प्रिय है।

Q: स्थापना के लिए दोपहर का मुहूर्त ही क्यों शुभ माना जाता है?

A: शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्री गणेश जी का जन्म भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी के दिन मध्याह्न काल यानी दोपहर के प्रहर में हुआ था, इसलिए इसी समय उनकी स्थापना और पूजा करना सर्वाधिक फलदायी होता है।..

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