Guided by Best Gold Medalist Astrologers
25,000+ Learners
10+ Mentors
4.9+ Google Rating

Talk to our Counsellor

Fill details and we will call you back instantly.

+91
Skip to Content


Raksha Bandhan 2026 Bhadra Kaal: Bhadra Kab Hai Aur Rakhi Kyon Nahi Bandhte?

रक्षाबंधन 2026 पर भद्रा का साया कब तक है? एक पेशेवर ज्योतिषी से सरल भाषा में जानिए भद्रा की रहस्यमयी कहानी, राखी न बांधने का असली कारण और करियर व रिश्तों को संवारने वाले विशेष उपाय।
17 August 2026 by
Raksha Bandhan 2026 Bhadra Kaal: Bhadra Kab Hai Aur Rakhi Kyon Nahi Bandhte?
Ajeet Verma

Raksha Bandhan 2026 Bhadra Kaal: Bhadra Kab Hai Aur Rakhi Kyon Nahi Bandhte? | Skill Astro

Raksha Bandhan 2026 Bhadra Kaal: भद्रा कब है और इस दौरान राखी क्यों नहीं बांधनी चाहिए?

नमस्कार! एक ज्योतिषी के रूप में मेरे पास हर साल सावन का महीना आते ही एक सवाल सबसे ज्यादा आता है, और उस सवाल में अक्सर एक अनजाना सा डर छुपा होता है। बहनें घबराई हुई आवाज में पूछती हैं, "पंडित जी, इस बार भद्रा कब से कब तक है? कहीं मेरे भाई को कोई नुकसान तो नहीं होगा?"

यह डर स्वाभाविक है। एक बहन जो अपने भाई की लंबी उम्र और सफलता के लिए व्रत रखती है, प्रार्थना करती है, वह कभी नहीं चाहेगी कि अनजाने में भी वह किसी ऐसे अशुभ समय में राखी बांधे जिससे उसके भाई के जीवन पर कोई आंच आए। भद्रा का नाम सुनते ही मन में कई तरह के सवाल उठने लगते हैं। आखिर यह भद्रा है कौन? यह इतनी डरावनी क्यों मानी जाती है? और सबसे बड़ा सवाल—क्या साल 2026 के रक्षाबंधन पर भद्रा का कोई अशुभ साया पड़ने वाला है?

आज मैं आपके साथ एक गहरे ज्योतिषीय और पौराणिक विश्लेषण के माध्यम से भद्रा के इस रहस्य को पूरी तरह से सुलझाने जा रहा हूँ। हम एकदम सरल भाषा में समझेंगे कि यह ब्रह्मांडीय ऊर्जा कैसे काम करती है, ताकि आप बिना किसी भय या कन्फ्यूजन के अपने भाई की कलाई पर प्रेम का यह पवित्र धागा बांध सकें।

भद्रा आखिर है कौन? 

ज्योतिष शास्त्र और हमारे पुराणों में भद्रा का बहुत ही रोचक और थोड़ा डरावना वर्णन मिलता है। बहुत से लोग नहीं जानते कि भद्रा कोई भूत-प्रेत या बुरी आत्मा नहीं है, बल्कि वह साक्षात भगवान सूर्य देव की पुत्री हैं। जी हाँ! और इतना ही नहीं, वह न्याय के देवता और कर्मफल दाता शनि देव की सगी बहन हैं।

जैसे शनि देव का स्वभाव थोड़ा कठोर और न्यायप्रिय है, वैसे ही भद्रा का स्वभाव जन्म से ही बहुत उग्र और क्रोधी बताया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब भद्रा का जन्म हुआ, तो वह सृष्टि में तबाही मचाने लगी थी। वह शुभ कार्यों, यज्ञों और अनुष्ठानों में विघ्न डालने लगी। उनके इस रौद्र रूप को देखकर सूर्य देव बहुत चिंतित हो गए।

तब ब्रह्मा जी ने भद्रा को शांत किया और पंचांग (समय की गणना) के एक महत्वपूर्ण हिस्से 'करण' (विष्टि करण) में स्थान दिया। ब्रह्मा जी ने भद्रा को यह निर्देश दिया कि जो व्यक्ति तुम्हारे समय काल (भद्रा काल) में कोई भी शुभ कार्य करेगा, तुम उसमें बाधा उत्पन्न करोगी, लेकिन जो तुम्हारे समय का सम्मान करते हुए शुभ कार्य नहीं करेगा, तुम उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचाओगी। यही कारण है कि भद्रा काल में कोई भी शुभ काम, विशेषकर रक्षाबंधन और होलिका दहन, पूरी तरह से वर्जित माने जाते हैं।

भद्रा काल में राखी क्यों नहीं बांधी जाती? 

यह तो हुई भद्रा के जन्म की बात, लेकिन रक्षाबंधन से इसका क्या सीधा संबंध है? इसके पीछे रामायण काल की एक बहुत ही प्रसिद्ध और रोंगटे खड़े कर देने वाली कथा जुड़ी हुई है, जो हर बहन को जाननी चाहिए।

कथा के अनुसार, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने अपने भाई रावण को रक्षासूत्र (राखी) बांधा था। लेकिन उसने यह ध्यान नहीं रखा कि उस समय ब्रह्मांड में 'भद्रा काल' चल रहा था। भद्रा के उस अशुभ समय में बांधी गई राखी ने रावण की रक्षा करने के बजाय, उसके विनाश का रास्ता खोल दिया।

कहा जाता है कि भद्रा काल में बांधी गई राखी के कारण ही रावण की मति भ्रष्ट हुई, उसने माता सीता का हरण किया और अंततः पूरे रावण साम्राज्य और उसके कुल का सर्वनाश हो गया। यही वह ऐतिहासिक और पौराणिक कारण है जिसकी वजह से कोई भी बहन, चाहे कितनी भी मजबूरी हो, भद्रा के समय अपने भाई की कलाई पर राखी नहीं बांधती। हर बहन चाहती है कि उसका भाई हमेशा सुरक्षित रहे, इसलिए वह भद्रा के समाप्त होने का धैर्यपूर्वक इंतजार करती है।

रक्षाबंधन 2026 में भद्रा का समय 

अब आते हैं सबसे महत्वपूर्ण सवाल पर। क्या 2026 में राखी बांधते समय आपको भद्रा का सामना करना पड़ेगा? इसका जवाब है—बिल्कुल नहीं! साल 2026 में ग्रहों की स्थिति बहनों के लिए बहुत ही शुभ और अनुकूल है।

28 अगस्त 2026 को जब हम रक्षाबंधन मनाएंगे, तब भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी होगी। आइए इसे इस सरल चार्ट के माध्यम से समझते हैं:

विवरण (Bhadra Details)दिनांक और सटीक समय (Date & Time)
रक्षाबंधन का मुख्य दिनशुक्रवार, 28 अगस्त 2026
भद्रा काल की शुरुआत27 अगस्त 2026 की रात में
भद्रा काल की समाप्ति28 अगस्त 2026, सूर्योदय से पूर्व
क्या 28 अगस्त को भद्रा का साया है?नहीं, बिल्कुल नहीं! (पूरी तरह सुरक्षित)
राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्तसुबह 05:57 बजे से सुबह 09:48 बजे तक

ज्योतिषीय निष्कर्ष: चूँकि भद्रा 28 अगस्त की सुबह राखी बांधने के मुहूर्त से बहुत पहले ही खत्म हो रही है, इसलिए आप पूरे दिन (केवल राहुकाल को छोड़कर) बिना किसी डर या चिंता के राखी बांध सकती हैं।

जीवन की बाधाओं को दूर करने वाले विशेष उपाय 

अक्सर मेरे पास लोग यह जानने आते हैं कि पारिवारिक या पेशेवर जीवन में जो बड़ी रुकावटें आ गई हैं, उन्हें कैसे दूर किया जाए। अपने ज्योतिषीय शोध और अनुभव के दौरान, मैंने जीवन की समस्याओं को सुलझाने के लिए कई गहराई से शोध किए गए उपाय (deeply researched remedies) तैयार किए हैं। अगर आप भी अपने भाई या अपने जीवन में करियर की रुकावटों (career recovery) या खराब हो चुके रिश्तों को सुधारने (relationship recovery) की कोशिश कर रहे हैं, तो रक्षाबंधन का सिद्ध मुहूर्त इसके लिए सबसे बेहतरीन समय है।

रिश्तों और करियर की सफलता के लिए 21-दिवसीय प्रयोग:

रक्षाबंधन की सुबह, राखी बांधने के शुभ मुहूर्त में, एक लाल रंग के साफ कागज पर अपने भाई के करियर की सफलता या किसी टूटे हुए पारिवारिक रिश्ते के मधुर होने की कामना लिखें। इसे एक '21-दिवसीय मेनिफेस्टेशन प्रक्रिया' (21-day manifestation process) के रूप में लें। उस कागज को अपने घर के पूजा स्थल पर भगवान विष्णु के चरणों में रख दें। अगले 21 दिनों तक लगातार रोज सुबह उठकर उस कागज को अपने हाथों में लें, आँखें बंद करें, और पूरे विश्वास के साथ ब्रह्मांड से जुड़कर यह महसूस करें कि आपकी वह इच्छा पूरी हो गई है। सावन पूर्णिमा की पवित्र ऊर्जा से शुरू किया गया यह उपाय अवचेतन मन और ब्रह्मांडीय ऊर्जा को एक साथ मिलाता है, और आपको इसके बेहद चमत्कारी परिणाम देखने को मिलते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या भद्रा काल में भगवान को राखी बांधी जा सकती है?

नहीं। भद्रा का अशुभ प्रभाव हर शुभ कार्य पर पड़ता है। इसलिए भगवान (जैसे लड्डू गोपाल या गणेश जी) को भी राखी भद्रा काल समाप्त होने के बाद, शुभ मुहूर्त में ही बांधनी चाहिए।

2. अगर हम भद्रा के समय अनजाने में राखी बांध दें, तो क्या करें?

अगर अनजाने में ऐसा हो गया है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि ईश्वर भाव देखते हैं। फिर भी मन की शांति के लिए, भाई को चाहिए कि वह भगवान शिव के मंदिर में जाकर जल अर्पित करे और महामृत्युंजय मंत्र का 11 बार जाप करे।

3. भद्रा का निवास स्थान कहाँ होता है?

ज्योतिष के अनुसार चंद्रमा की स्थिति के आधार पर भद्रा का वास स्वर्ग, पाताल या पृथ्वी लोक पर होता है। जब भद्रा पृथ्वी लोक पर होती है, तब इसका प्रभाव सबसे अधिक विनाशकारी माना जाता है।

4. क्या 2026 में दोपहर के समय कोई अशुभ मुहूर्त है?

28 अगस्त 2026 को भद्रा तो नहीं है, लेकिन सुबह 10:46 बजे से दोपहर 12:22 बजे तक 'राहुकाल' रहेगा। राहुकाल में भी शुभ कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए इस डेढ़ घंटे के अंतराल में राखी न बांधें। इसके अलावा आप दिन में कभी भी राखी बांध सकते हैं।

निष्कर्ष

रक्षाबंधन केवल एक पारंपरिक रस्म नहीं है, यह ऊर्जा, विश्वास और प्रेम का एक बहुत बड़ा आध्यात्मिक विज्ञान है। भद्रा की कथा हमें यह सिखाती है कि ब्रह्मांड में समय (Time) सबसे बलवान है। सही समय पर किया गया छोटा सा शुभ कार्य भी हजार गुना फल देता है, और गलत समय पर की गई छोटी सी भूल भी बड़े नुकसान का कारण बन सकती है।

साल 2026 में बहनों को भद्रा से बिल्कुल भी डरने या घबराने की जरूरत नहीं है।

Read in  ENGLISH
Sign in to leave a comment
SEND QUERY CALL US
Skill Astro Footer - Odoo Compatible