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शनिवार अमावस्या 21 DECEMBER 2025: शनि अमावस्या का पूर्ण महत्व, पूजा विधि, उपाय और लाभ

शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या एक अत्यंत शक्तिशाली ज्योतिषीय और आध्यात्मिक तिथि है, जिसे शनि अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा, दान और जप करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं,
19 December 2025 by
शनिवार अमावस्या 21 DECEMBER 2025: शनि अमावस्या का पूर्ण महत्व, पूजा विधि, उपाय और लाभ
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 Shani Amavasya

शनिवार को पड़ने वाली अमावस्या एक अत्यंत शक्तिशाली ज्योतिषीय और आध्यात्मिक तिथि है, जिसे शनि अमावस्या के नाम से जाना जाता है। इस दिन शनिदेव की विशेष कृपा प्राप्त करने के लिए पूजा, दान और जप करने से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं, शनि दोष, साढ़ेसाती, ढैय्या के कष्ट कम होते हैं तथा कर्म फल में सुधार आता है। शनि अमावस्या पर किए गए सरल उपाय वर्ष भर शनि की अशुभ दृष्टि से रक्षा करते हैं और स्थिरता, धन, स्वास्थ्य तथा न्यायपूर्ण जीवन प्रदान करते हैं।

यह ब्लॉग शनि अमावस्या 2025 के पूर्ण विवरण, महत्वपूर्ण नियमों, स्टेप बाय स्टेप पूजा विधि, राशि अनुसार उपाय, दान सामग्री, वर्जित कार्यों और अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों पर आधारित है। यदि आप शनि से संबंधित किसी भी समस्या से जूझ रहे हैं तो कल का यह दिन आपके लिए सुनहरा अवसर साबित होगा।

शनि अमावस्या क्या है और इसका ज्योतिषीय महत्व

शनि अमावस्या वह विशेष अमावस्या तिथि है जो शनिवार के दिन आती है। ज्योतिष शास्त्र में शनि ग्रह को न्याय का देवता, कर्म फल दाता और अनुशासन का प्रतीक माना गया है। जब अमावस्या शनिवार को संयोग बनाती है तो शनि देव की शक्ति चरम पर होती है और उनके उपायों का फल तुरंत तथा स्थायी रूप से मिलता है।

वैदिक ज्योतिष के अनुसार अमावस्या पितृ पक्ष और तर्पण का समय होता है जबकि शनिवार शनि की आराधना का। इस संयोग से शनि अमावस्या पितृ ऋण, कर्म ऋण और शनि दोष निवारण का सर्वोत्तम दिवस बन जाता है। शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या या महादशा भोग रहे जातकों के लिए यह दिन विशेष रूप से फलदायी होता है।

इस दिन किए गए दान, पूजा और मंत्र जप से न केवल वर्तमान कष्ट दूर होते हैं बल्कि भविष्य के शनि पीड़ाओं से भी रक्षा मिलती है। शास्त्रों में कहा गया है कि शनि अमावस्या पर शनि की प्रसन्नता से राजयोग, धन प्राप्ति, स्वास्थ्य लाभ और पारिवारिक सुख की प्राप्ति होती है।

2025 में शनि अमावस्या की तिथि और पंचांग विवरण

2025 में भाद्रपद मास की अमावस्या शनिवार को पड़ रही है जो शनि अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार इस दिन अमावस्या तिथि सूर्योदय काल से प्रारंभ होकर पूरे दिन प्रभावी रहेगी। शनि अमावस्या पर पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त प्रातःकाल 5 से 7 बजे तथा संध्या काल 6 से 8 बजे माना गया है।

इस वर्ष शनि कुंभ राशि में गोचर कर रहे हैं जिससे मकर, कुंभ और मीन राशि पर साढ़ेसाती तथा तुला, वृश्चिक, धनु और मीन पर ढैय्या का प्रभाव है। शनि अमावस्या इन सभी राशियों के लिए शनि शांति का विशेष अवसर लेकर आ रही है। पंचांग में उल्लेख है कि इस दिन तैलीय पदार्थों का दान तथा पीपल पूजा अत्यंत पुण्यकारी फल देगी।

शनि अमावस्या का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व

शनि अमावस्या को शनि शनीयारी अमावस्या भी कहा जाता है। पुराणों में वर्णन है कि शनि देव भगवान शिव के परम भक्त हैं और उनकी आराधना से सभी ग्रह दोष शांत हो जाते हैं। इस दिन शनि मंदिरों में लाखों भक्त एकत्रित होकर शनि शांति पूजा करते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से शनि अमावस्या आत्मचिंतन, कर्म सुधार और जीवन में अनुशासन लाने का प्रतीक है। शनि ग्रह जीवन के कठोर सबक सिखाते हैं लेकिन उनकी कृपा से ही स्थायी सफलता मिलती है। इस दिन हनुमान जी की पूजा भी शनि दोष निवारण के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है क्योंकि हनुमान जी शनि के गुरु हैं।

शनि अमावस्या पर पूजा सामग्री और तैयारी

शनि अमावस्या पूजा के लिए निम्नलिखित सामग्री एकत्र करें:

  • काले तिल, उड़द की दाल, सरसों का तेल, काला कपड़ा, काली उड़द

  • लोहे की वस्तुएं, कोयला, नीले या काले फूल, अगरबत्ती, दीपक

  • शनि यंत्र, शनि चालisa, शनि मंत्र माला, हवन सामग्री

  • पीपल पत्ता, काले घोड़े की नाल, शनि स्तोत्र पुस्तक

पूजा स्थल की शुद्धि के लिए गंगाजल छिड़कें तथा स्वयं स्नान कर काले या नीले वस्त्र धारण करें। पूजा उत्तर या पश्चिम मुख करके करें।

शनि अमावस्या पूजा विधि स्टेप बाय स्टेप

चरण 1: शुद्धिकरण और संकल्प

प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें। शनि यंत्र या शनि प्रतिमा स्थापित कर संकल्प लें- "मैं अमुक शनि अमावस्या पर शनि प्रसन्न करने हेतु पूजन करूंगा।"

चरण 2: शनि यंत्र स्थापना और पंचोपचार

शनि यंत्र पर तिल का लेप करें। पंचोपचार विधि से पूजन करें- गंध, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य। सरसों तेल का दीपक जलाएं।

चरण 3: शनि मंत्र जाप

"ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः" मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। जप माला पर ध्यान केंद्रित रखें। शनि चालisa पाठ करें।

चरण 4: हवन और तर्पण

शनि मंत्र से 108 आहुति दें। पितृ तर्पण के लिए काले तिल, जल और कुशा से तर्पण करें। पीपल वृक्ष को जल अर्पित करें।

चरण 5: दान और क्षमा याचना

काले तिल, उड़द दाल, तेल, लोहे की वस्तु आदि का दान करें। अंत में शनि देव से क्षमा याचना करें।

शनि अमावस्या पर विशेष शनि शांति उपाय

  • पीपल पूजा: पीपल वृक्ष की जड़ में सरसों तेल का दीपक जलाएं। सात बार परिक्रमा करें।

  • हनुमान पूजा: हनुमान चालisa 11 बार पाठ करें। सिंदूर अर्पित करें।

  • तेल अभिषेक: शनि मंदिर में सरसों तेल अर्पित करें या घर पर कलश में तेल भरकर रखें।

  • कर्म सुधार: जीवन में अनुशासन, समयनिष्ठा और सेवा भाव अपनाने का संकल्प लें।

  • शनि स्तोत्र: दशरथकृत शनि स्तोत्र का पाठ करें।

ये उपाय 43 दिनों तक निरंतर करने से शनि की पूरी कृपा प्राप्त होती है।

12 राशियों के लिए शनि अमावस्या उपाय

मेष: काले तिल दान, हनुमान मंदिर दर्शन।

वृषभ: सरसों तेल दान, शनि मंत्र जाप।

मिथुन: उड़द दाल दान, पीपल पूजा।

कर्क: लोहे की वस्तु दान, शनि चालisa।

सिंह: काला कपड़ा दान, तेल अभिषेक।

कन्या: कोयला दान, कर्म सुधार संकल्प।

तुला: शनि यंत्र स्थापना, मंत्र जाप।

वृश्चिक: हनुमान चालisa, पीपल दीपक।

धनु: काले तिल तर्पण, दान पुण्य।

मकर: विशेष शनि शांति पूजा।

कुंभ: सरसों तेल अभिषेक।

मीन: शनि स्तोत्र पाठ।

शनि अमावस्या पर दान की सामग्री और लाभ

दान सामग्रीलाभसमय
काले तिलशनि दोष नाशप्रातःकाल
सरसों तेलसाढ़ेसाती शांतिसंध्या काल
उड़द दालधन प्राप्तिदोपहर
लोहे की वस्तुकोर्ट कचहरी जीतसायंकाल
काला कपड़ास्वास्थ्य लाभरात्रि

इन दानों से शनि देव तत्काल प्रसन्न होते हैं।

शनि अमावस्या पर वर्जित कार्य (क्या न करें)

  • मांसाहार, मदिरा सेवन निषिद्ध।

  • झूठ बोलना, क्रोध करना, गाली गलौज वर्जित।

  • कर्ज चुकाना टालना न करें।

  • जानवरों को कष्ट न दें।

  • आलस्य और विलासिता से दूर रहें।

  • विवाह संस्कार आदि शुभ कार्य न करें।

इनका पालन न करने से शनि पीड़ा बढ़ सकती है।

शनि अमावस्या के चमत्कारी लाभ और अनुभव

अनेक भक्तों ने शनि अमावस्या पर उपाय करने से कर्ज मुक्ति, नौकरी प्राप्ति, विवाह में सफलता और रोग निवारण के अनुभव साझा किए हैं। शनि की कृपा से जीवन में स्थिरता आती है तथा कर्म फल शीघ्र प्राप्त होता है। यह दिन जीवन बदलने का अवसर प्रदान करता है।

FAQ - शनि अमावस्या 2025 संबंधित प्रश्न

प्रश्न 1: शनि अमावस्या 2025 कब है?

2025 में भाद्रपद अमावस्या शनिवार को शनि अमावस्या के रूप में मनाई जाएगी। पूजा मुहूर्त प्रातः 5-7 बजे।

प्रश्न 2: शनि अमावस्या पर कौन सा सबसे सरल उपाय है?

पीपल वृक्ष में सरसों तेल का दीपक जलाकर शनि मंत्र 108 बार जप करना सबसे सरल और प्रभावी उपाय है।

प्रश्न 3: क्या शनि अमावस्या से साढ़ेसाती खत्म हो जाती है?

नियमित उपाय से साढ़ेसाती के कष्ट कम होते हैं तथा शनि कृपा बढ़ती है लेकिन पूर्ण समाप्ति गोचर पर निर्भर करती है।

प्रश्न 4: शनि अमावस्या पर कौन सी दान सामग्री सबसे उत्तम है?

काले तिल, सरसों तेल और उड़द दाल का दान शनि देव को सबसे प्रिय है।

प्रश्न 5: घर पर शनि पूजा कैसे करें?

शनि यंत्र स्थापित कर पंचोपचार पूजन, मंत्र जाप, हवन और दान करें। हनुमान चालisa अवश्य पढ़ें।

प्रश्न 6: शनि अमावस्या पर मांसाहार क्यों वर्जित है?

शनि शाकाहारी देव हैं, मांसाहार से वे कुपित होते हैं तथा पीड़ा बढ़ती है।

प्रश्न 7: क्या शनि अमावस्या पर तेल दान करना चाहिए?

हां, सरसों का तेल दान शनि शांति के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

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