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केतु ग्रह - वैदिक ज्योतिष में महत्व, प्रभाव और संपूर्ण जानकारी

केतु ग्रह हमारे आध्यात्मिकता, मोक्ष और पूर्वजन्म के कर्मों का प्रतीक है। यह हमारे जीवन में त्याग, वैराग्य और आंतरिक ज्ञान लाता है। केतु मंत्र, रत्न, रंग क्या है? इस लेख में हम इन्हीं बिंदुओं पर बात करेंगे।
22 December 2025 by
केतु ग्रह - वैदिक ज्योतिष में महत्व, प्रभाव और संपूर्ण जानकारी
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केतु ग्रह हमारे आध्यात्मिकता, मोक्ष और पूर्वजन्म के कर्मों का प्रतीक है। यह हमारे जीवन में त्याग, वैराग्य और आंतरिक ज्ञान लाता है। केतु मंत्र, रत्न, रंग क्या है? इस लेख में हम इन्हीं बिंदुओं पर बात करेंगे।

प्रस्तावना

केतु ग्रह हमारे आध्यात्मिकता, मोक्ष और पूर्वजन्म के कर्मों का प्रतीक है। यह हमारे जीवन में त्याग, वैराग्य और आंतरिक ज्ञान लाता है। हिंदू धर्म में केतु को आध्यात्मिक विकास के देव के रूप में पूजा जाता है। केतु की गहरी और रहस्यमय ऊर्जा हमें भौतिक जीवन से परे की सत्यता की ओर ले जाती है। परंतु इसका एक और महत्वपूर्ण पहलू है वैदिक ज्योतिष में केतु को सबसे आध्यात्मिक और मुक्तिदायक छाया ग्रह के रूप में जाना जाता है। इस लेख में हम केतु ग्रह के बारे में विस्तार से जानेंगे। हम जानेंगे कि केतु (ketu) का वैदिक ज्योतिष में क्या महत्व है? इसके साथ ही आध्यात्मिकता और मोक्ष पर केतु का क्या प्रभाव है? केतु की पौराणिक मान्यता क्या है? केतु मंत्र, रत्न, रंग क्या है? इस लेख में हम इन्हीं बिंदुओं पर बात करेंगे।

केतु ग्रह का परिचय

केतु ग्रह को यदि खगोलीय दृष्टि से देखा जाए तो यह सौर मंडल में एक छाया ग्रह है जिसका कोई भौतिक रूप नहीं है। केतु का आध्यात्मिक स्वभाव और अदृश्य प्रकृति इसकी सबसे खास विशेषता है। केतु को पूंछ (Tail) ग्रह भी कहा जाता है। केतु के कारण ही हमारी आध्यात्मिकता, वैराग्य और मोक्ष की यात्रा शुरू होती है। वैदिक ज्योतिष में भी केतु को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। केतु को आध्यात्मिक और मुक्तिदायक ग्रह माना जाता है। ये प्रभावी होते हैं तो जातक को गहरी आंतरिक शांति और आध्यात्मिक विकास मिलता है। केतु को आध्यात्मिकता, त्याग और मोक्ष का ग्रह कहा जाता है।

ज्योतिष में केतु ग्रह का महत्व

आध्यात्मिकता और मोक्ष का कारक ग्रह

ज्योतिष में केतु को आध्यात्मिकता, मोक्ष और पूर्वजन्म के कर्मों का कारक माना जाता है। इसके साथ ही ज्योतिष में केतु को रहस्यवाद, गूढ़ विज्ञान और आंतरिक शांति का प्रतिनिधित्व भी माना जाता है। केतु के कारण ही जातक को आध्यात्मिक ज्ञान और आंतरिक विकास मिलता है। जब भी किसी जातक की कुंडली का आकलन किया जाता है तो केतु की स्थिति को देखा जाता है। क्योंकि ज्योतिष में केतु को आध्यात्मिकता, पूर्वजन्म और मुक्ति का कारक कहा जाता है।

केतु के प्रभाव

केतु प्रभावी हो तो जातक अपने जीवन में आध्यात्मिक और चिंतनशील होता है। इसके साथ ही वह वैरागी, ज्ञानी और आंतरिक रूप से शांत होता है। महिला की कुंडली में केतु को पारिवारिक विच्छेद, आध्यात्मिक विकास और आंतरिक शांति के लिए देखा जाता है।

ज्योतिष में केतु का अपना राशि चक्र भी है। यदि जातक की कुंडली में केतु की महादशा चल रही हो तो केतु की गतिविधि के अनुसार जातक को विशेष आध्यात्मिक अनुभव मिलते हैं।

ज्योतिष में केतु की कोई नियत राशि नहीं होती क्योंकि केतु अपनी गति से चलता है। लेकिन धनु और मकर राशि में केतु का प्रभाव विशेष माना जाता है। केतु सभी राशियों में अपने प्रभाव को छोड़ता है

केतु ग्रह की राशि स्थिति

केतु का 12 राशियों में प्रभाव

धनु राशि (Sagittarius) - केतु का मुख्य स्थान:

जिन व्यक्तियों की कुंडली में केतु धनु राशि में स्थित है, वे बेहद दार्शनिक, आध्यात्मिक और ज्ञान की खोज में रत होते हैं। धनु राशि की पूरी जानकारी

मकर राशि (Capricorn) - केतु का मुख्य स्थान:

मकर में केतु व्यक्ति को जिम्मेदार किंतु आध्यात्मिक रूप से विकसित बनाता है। मकर राशि की पूरी जानकारी

मेष राशि (Aries):

मेष में केतु व्यक्ति को आध्यात्मिक लड़ाई के लिए प्रेरित करता है। मेष राशि की पूरी जानकारी

वृषभ राशि (Taurus):

वृषभ में केतु व्यक्ति को भौतिकता से मुक्त करने का प्रयास करता है। वृषभ राशि की पूरी जानकारी

मिथुन राशि (Gemini):

मिथुन में केतु व्यक्ति को आध्यात्मिक ज्ञान की ओर ले जाता है। मिथुन राशि की पूरी जानकारी

कर्क राशि (Cancer):

कर्क में केतु व्यक्ति को भावनात्मक दूरी देता है। कर्क राशि की पूरी जानकारी

सिंह राशि (Leo):

सिंह में केतु व्यक्ति को अहंकार से परे ले जाता है। सिंह राशि की पूरी जानकारी

कन्या राशि (Virgo):

कन्या में केतु व्यक्ति को आंतरिक शुद्धता की ओर ले जाता है। कन्या राशि की पूरी जानकारी

तुला राशि (Libra):

तुला में केतु व्यक्ति को न्यायसंगत और आध्यात्मिक दृष्टिकोण देता है। तुला राशि की पूरी जानकारी

वृश्चिक राशि (Scorpio):

वृश्चिक में केतु व्यक्ति को रहस्यवाद और आंतरिक शक्ति की ओर ले जाता है। वृश्चिक राशि की पूरी जानकारी

कुंभ राशि (Aquarius):

कुंभ में केतु व्यक्ति को मानवतावादी और आध्यात्मिक सुधारक बनाता है। कुंभ राशि की पूरी जानकारी

मीन राशि (Pisces):

मीन में केतु व्यक्ति को पूर्ण आध्यात्मिकता की ओर ले जाता है। मीन राशि की पूरी जानकारी

केतु का मानव जीवन पर प्रभाव

शारीरिक प्रभाव

केतु हमारे आध्यात्मिक विकास, पूर्वजन्म के कर्मों और मोक्ष का शक्ति का स्रोत है। इन्हीं के कारण हम आंतरिक विकास और शांति पाते हैं। केतु का प्रभाव हमारे तंत्रिका तंत्र, शरीर के निचले भाग और आंतरिक चक्रों (चक्रा) पर भी पड़ता है।

ज्योतिष के अनुसार जिस जातक की कुंडली में केतु शक्तिशाली होते हैं उसका व्यक्तित्व रहस्यमय, गहन और आध्यात्मिक दिखता है। जातक के शरीर में केतु आध्यात्मिकता, अतीत के कर्मों और आंतरिक शांति का प्रतिनिधित्व करते हैं। शारीरिक संरचना व ज्योतिष के अनुसार केतु शरीर के निचले भागों को दर्शाता है।

मजबूत केतु के लाभ

ज्योतिष के मुताबिक यदि किसी जातक की कुंडली में केतु मजबूत (बली) है तो:

  • जातक बेहद आध्यात्मिक और चिंतनशील होता है

  • जातक को गहरा आंतरिक ज्ञान और विवेक मिलता है

  • वह सांसारिकता से ऊपर उठा हुआ होता है

  • जातक वैरागी और त्यागी प्रवृत्ति वाला होता है

  • जीवन में उसे आंतरिक शांति और सन्तुष्टि मिलती है

  • जातक रहस्यवाद और गूढ़ विज्ञान में सफल हो सकता है

  • पूर्वजन्म के कर्मों का समाधान होता है

  • जातक सिद्धि और आध्यात्मिक शक्तियों का विकास कर सकता है

  • आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास मिलता है

  • जातक मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ता है

  • सामाजिक दायित्व और मानवता की समझ आती है

कमजोर केतु के नुकसान

जिस जातक की कुंडली में केतु पीड़ित होते हैं या प्रभावी नहीं होते हैं उन जातकों पर इसका गहरा असर पड़ता है:

  • जातक भौतिकता में फंसा हुआ रह सकता है

  • आध्यात्मिक विकास में बाधा आ सकती है

  • पारिवारिक विच्छेद और अलगाववाद हो सकता है

  • जातक अकेलापन और अलगथलगपन महसूस कर सकता है

  • स्वास्थ्य समस्याएं (पैर, पाचन) आ सकती हैं

  • व्यसन और नकारात्मक आदतें लग सकती हैं

  • जातक आत्मविश्वास की कमी महसूस कर सकता है

  • रिश्ते और संबंध टूटने का खतरा

  • गहरी मानसिक समस्याएं हो सकती हैं

  • जातक जीवन के उद्देश्य से भटका हुआ महसूस कर सकता है

  • पूर्वजन्म के कर्मों का बोझ महसूस होता है

केतु की पौराणिक मान्यता

आध्यात्मिक गुरु के रूप में केतु

केतु को आध्यात्मिक ज्ञान और मोक्ष के प्रदाता के रूप में पूजा जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं में केतु को समुद्र मंथन के समय बनाया गया छाया ग्रह और मोक्षदायक शक्ति के रूप में दर्शाया गया है। केतु की आध्यात्मिक शक्ति और त्याग को सर्वोच्च माना जाता है।

मान्यता के अनुसार केतु और राहु भाई-भाई हैं लेकिन विरोधी शक्तियां प्रदान करते हैं। केतु को मोक्षदायक, वैराग्य प्रदायक, स्पष्टवादी जैसे नामों से भी जाना जाता है।

केतु और आध्यात्मिकता

जैसा कि आपने देखा होगा, आपके घर में या आस-पड़ोस में कोई लोग केतु को धूप और चने के दान अर्पित करते हैं और केतु को समर्पित उपाय करते हैं। क्योंकि जातक इसके आध्यात्मिकता, आंतरिक शांति और मोक्ष संबंधी लाभ को पाने के लिए ऐसा करते हैं।

केतु को 18.6 वर्ष का चक्र माना जाता है। केतु हमेशा आगे की ओर (direct) चलता है जो कि आगे की ओर बढ़ना और मोक्ष की ओर यात्रा का प्रतीक है।

केतु से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी

केतु के सिंबल्स

तत्वविवरण
यंत्रकेतु यंत्र
मंत्रॐ केतवे नमः
रत्नबिल्लौर (Cat's Eye/लहसुनिया)
रंगभूरा / तांबा / गहरा पीला
जड़धूप (Incense)
दिनमंगलवार (केतु के साथ)
दिशादक्षिण
धातुतांबा

केतु मंत्र

ॐ केतवे नमः - यह केतु का सबसे प्रसिद्ध और प्रभावी मंत्र है। इसे मंगलवार को 108 बार जपने से विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलता है।

बिल्लौर रत्न

केतु का रत्न बिल्लौर (Cat's Eye) या लहसुनिया है। यह भूरे-तांबे के रंग का होता है। बिल्लौर को चाँदी की अंगूठी में लगाकर मंगलवार को पहना जाता है। कम से कम 3-4 कैरेट का बिल्लौर पहनना चाहिए। बिल्लौर पहनने से केतु की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती हैआध्यात्मिक विकास होता है और आंतरिक शांति मिलती है।

केतु का रंग

केतु का रंग भूरा (Brown) या तांबा (Copper) है। ये रंग आध्यात्मिकता, मिट्टी से जुड़ाव और आंतरिक शांति का प्रतीक हैं। मंगलवार को भूरे या तांबे के रंग के कपड़े पहनने से केतु की कृपा प्राप्त होती है।

केतु के शक्तिशाली उपाय

केतु पूजा

यदि जातक की कुंडली में केतु कमजोर या पीड़ित हैं तो निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

मंगलवार को विशेष पूजा:

  • दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके बैठें

  • केतु को धूप और चने का प्रसाद अर्पित करें

  • केतु मंत्र का जप करें

गणेश की पूजा

गणेश की पूजा केतु को मजबूत करने के लिए बेहद प्रभावी उपाय है:

  • मंगलवार को गणेश जी को दर्शन करें

  • विघ्नहर्ता गणेश की स्तुति करें

  • आध्यात्मिक विकास और बाधाओं का निवारण होता है

केतु मंत्र जप

केतु के लिए विशेष जप:

  • दैनिक 108 बार ॐ केतवे नमः जप करें

  • मंगलवार को करना सर्वश्रेष्ठ है

  • आध्यात्मिक विकास और आंतरिक शांति मिलती है

मंगलवार व्रत

मंगलवार को व्रत रखना:

  • मंगलवार को विशेष व्रत रखें

  • गेहूं, दाल और धूप का सेवन करें

  • धूप को भगवान को भेंट करें

दान करें

मंगलवार को निम्नलिखित दान करें:

  • बिल्लौर (यदि संभव हो)

  • भूरे कपड़े

  • तांबे की वस्तुएं

  • गेहूं और दाल

  • दरिद्रों को भोजन कराएं

केतु महादशा (Mahadasha)

केतु की महादशा 7 वर्ष तक चलती है। यदि किसी की कुंडली में केतु की महादशा चल रही है तो:

यदि केतु मजबूत है:

  • आध्यात्मिक विकास और आंतरिक शांति मिलती है

  • पूर्वजन्म के कर्मों का समाधान होता है

  • रहस्यवाद और गूढ़ विज्ञान में रुचि बढ़ती है

  • संसार से वैराग्य आता है

  • आत्मज्ञान और सत्य की खोज होती है

यदि केतु कमजोर है:

  • भ्रम और अस्पष्टता

  • पारिवारिक समस्याएं और अलगाववाद

  • आध्यात्मिक विकास में बाधा

  • मानसिक समस्याएं और अवसाद

  • जीवन के उद्देश्य से भटकाव

अंकज्योतिष में केतु

अंकज्योतिष (Numerology) में संख्या 7 केतु से संबंधित है। यदि आपका जन्म संख्या 7 है, तो आप केतु के गुणों से प्रभावित हैं।

अधिक अंकज्योतिष जानकारी के लिए:

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

प्रश्न 1: क्या मैं बिना बिल्लौर के केतु को मजबूत कर सकता हूं?

हां, बिल्कुल। केतु मंत्र का जप, गणेश पूजा, और मंगलवार व्रत भी केतु को मजबूत करने के बहुत प्रभावी तरीके हैं।

प्रश्न 2: केतु पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन कौन सा है?

मंगलवार को केतु का दिन माना जाता है। दक्षिण दिशा की ओर मंगलवार को पूजा करना सबसे अधिक लाभकारी है।

प्रश्न 3: मंगलवार व्रत कैसे रखें?

मंगलवार को व्रत रखते समय गेहूं, दाल और चने का सेवन कर सकते हैं। पूरे दिन सात्विक आहार लें।

प्रश्न 4: ॐ केतवे नमः मंत्र कितनी बार जपना चाहिए?

आदर्श रूप से 108 बार दैनिक जप करें। यदि यह संभव न हो, तो 27 या 54 बार भी प्रभावी है।

प्रश्न 5: क्या महिलाएं केतु पूजन कर सकती हैं?

हां, बिल्कुल। केतु पूजा किसी भी लिंग के लिए खुला है। आध्यात्मिकता सभी के लिए महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 6: अगर मेरी कुंडली में केतु दुर्बल है, तो क्या मैं आध्यात्मिकता प्राप्त कर सकता हूं?

हां, निश्चित रूप से। सही उपाय और मेहनत से केतु को मजबूत किया जा सकता है।

प्रश्न 7: केतु की पूजा के लिए कौन सी दिशा सर्वश्रेष्ठ है?

दक्षिण दिशा केतु की दिशा है। इस दिशा की ओर मुंह करके पूजा करना सर्वश्रेष्ठ है।

प्रश्न 8: क्या मैं एक ही दिन में कई बार केतु मंत्र जप सकता हूं?

हां, आप सुबह, दोपहर, और शाम को जप कर सकते हैं।

निष्कर्ष

केतु ग्रह वैदिक ज्योतिष में आध्यात्मिकता, त्याग और मोक्ष का सबसे महत्वपूर्ण छाया ग्रह है। यह गहरा और रहस्यमय है लेकिन मुक्तिदायक भी है। इसका प्रभाव हमारी आध्यात्मिक यात्रा, आंतरिक शांति और जीवन के परम उद्देश्य पर सीधे पड़ता है। केतु को मजबूत करने के लिए नियमित पूजा-पाठ, गणेश की सेवा, और मंत्र जप सर्वोत्तम तरीके हैं।

याद रखें, केतु हमें आध्यात्मिकता, त्याग और मोक्ष सिखाता है। केतु के सकारात्मक प्रभाव को आकर्षित करने के लिए आंतरिक शांति खोजें, संसार के मोह से मुक्त हों, और आत्मज्ञान का मार्ग अपनाएं।

केतु आपके जीवन में आध्यात्मिक विकास, आंतरिक शांति और मोक्ष लाएं। केतु आपको आत्मज्ञान और परम सत्य की ओर ले जाएं।

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