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अश्लेषा नक्षत्र: स्वास्थ्य टिप्स और चरण फल | Ashlesha Nakshatra in Hindi

अश्लेषा नक्षत्र में जन्मे लोगों का बुध-नाग प्रभावित चतुर-भावुक व्यक्तित्व, करियर में गुप्त सफलता, वैवाहिक अनुकूलता, स्वास्थ्य सलाह और चार पादों का गहन विश्लेषण।
24 January 2026 by
अश्लेषा नक्षत्र: स्वास्थ्य टिप्स और चरण फल | Ashlesha Nakshatra in Hindi
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अश्लेषा नक्षत्र: स्वास्थ्य टिप्स और चरण फल | Ashlesha Nakshatra in Hindi | Skill Astro

अश्लेषा नक्षत्र वैदिक ज्योतिष का नौवां नक्षत्र है, जो कर्क राशि के 16°40' से 30°00' तक फैला हुआ है - कुल 13°20' का विस्तार, जहां सर्प की भांति लिपटकर गले लगाने की ऊर्जा है। इसका स्वामी बुध ग्रह है और देवता नागराज (सर्प) हैं, जो बुद्धि, रहस्य और परिवर्तन के प्रतीक हैं। कल्पना कीजिए एक सर्प की तरह - चमकदार, चतुर, कभी मीठा बोलकर आकर्षित करना तो कभी विषैला काट लेना। यही अश्लेषा जातकों का जीवन है: बाहरी रूप से कोमल लेकिन अंदर से गहन, भावनात्मक और रणनीतिक सोच वाले। ये लोग जीवन की गहराइयों को समझते हैं, रहस्यों के रखवाले होते हैं और चुनौतियों में छिपे अवसर ढूंढ निकालते हैं। कभी ईर्ष्या या छल का दोष लगता है, लेकिन वास्तव में ये अपने प्रियजनों की रक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरते हैं। 32-36 वर्ष की आयु के बाद जीवन में स्थिरता आती है, जब बुध की चतुराई धन-कीर्ति बरसाती है। कुंडली के 12 भाव में यह रहस्यमयी भावों को सक्रिय करता है, जबकि ग्रहों के 9 प्रकार में बुध की बुद्धि तीक्ष्ण बनाती है। अश्लेषा गंडमूल नक्षत्र है, इसलिए जन्म के 27 दिनों बाद नाग शांति पूजा अनिवार्य है।

पुरुषों का व्यक्तित्व

अश्लेषा नक्षत्र के पुरुष सर्प की तरह आकर्षक और रहस्यमयी होते हैं - मध्यम कद, गहरी चमकदार आंखें, पतली नाक, कोमल त्वचा और हमेशा सोचते हुए चेहरा, जो बातों से सबको मोहित कर लेते हैं लेकिन अंदर की गहराई कोई नहीं समझ पाता। इनका स्वभाव चतुर, भावुक और संवेदनशील होता है, परिवार के प्रति अत्यधिक लगाव रखते हैं लेकिन भावनाओं को छिपाने में माहिर। कभी ईर्ष्या, जलन या छलपूर्ण लग सकते हैं, पर ये सब प्रियजनों की रक्षा के लिए ही होता है - ये अपने जाल में फंसाने वाले नहीं, बल्कि सच्चे संकट में विष की तरह रक्षा करने वाले होते हैं। जीवन में ये आध्यात्मिकता और भौतिकता का संतुलन बनाते हैं, रहस्यमयी विषयों जैसे ज्योतिष, तंत्र या चिकित्सा में रुचि रखते हैं। धैर्यवान लेकिन बदला लेने वाले स्वभाव से रिश्तों में उतार-चढ़ाव आते हैं, फिर भी इनकी बुद्धिमत्ता हर समस्या का समाधान ढूंढ लेती है। सोचिए, ऐसा व्यक्ति जो व्यवसाय में चतुराई से आगे बढ़े, परिवार को गोपनीय रखे और जीवन के विष को अमृत बना दे!

पुरुषों का करियर

ये पुरुष गुप्त और बौद्धिक क्षेत्रों में चमकते हैं - ज्योतिष, चिकित्सा (विशेषकर विष विज्ञान), राजनीति, कानून, लेखा, खुफिया विभाग, व्यापार या दवाइयों का व्यवसाय। स्व-रोजगार इनके लिए स्वर्ग, खासकर दक्षिण दिशा में दुकान खोलने से अपार लाभ। 32 वर्ष तक गुप्त संघर्ष, फिर अचानक ऊंचाइयां छूते हैं जब बुध दशा में बड़े सौदे या विरासत मिलती है। इनकी रणनीतिक सोच टीम को विजयी बनाती है, लेकिन विश्वासघात से सावधान रहें।

पुरुषों की अनुकूलता

विवाह 27-31 वर्ष में होता है, पत्नी के साथ गहरा भावनात्मक लेकिन जटिल बंधन - ईर्ष्या के बाद प्रेम गहरा होता है। मां और बहनों से विशेष लगाव, मित्र कम लेकिन विश्वसनीय। पिता से कभी तनाव, कुल मिलाकर पारिवारिक जीवन रहस्यमयी लेकिन सुखद। संतान में बुद्धिमान बच्चे।

पुरुषों का स्वास्थ्य

शरीर संवेदनशील, पेट, त्वचा, विषाक्तता या मानसिक तनाव की समस्या संभव। आंखें और नर्वस सिस्टम का ध्यान रखें। योग, नाग पूजा और शाकाहारी आहार से स्वस्थ रहते हैं। अधिक तनाव से बचें।

महिलाओं का व्यक्तित्व

अश्लेषा की महिलाएं नागिणी सी सुंदर और चुंबकीय होती हैं - लंबे बाल, गहरी आंखें, कोमल शरीर और मधुर लेकिन रहस्यमयी बोल जो सबको बांध लें। भावुक, चतुर और परिवारप्रिय, ये घर की रक्षक बनती हैं। जिद्दी, ईर्ष्यालु लेकिन वफादार, प्रेम में विष की तरह बंध जाती हैं। कभी छल या अधिक संवेदनशीलता परेशान करती है, लेकिन इनकी अंतर्दृष्टि हर संकट हल कर देती है। समाज में सम्मानित लेकिन गुप्त जीवन जीती हैं।

महिलाओं का करियर

चिकित्सा, ज्योतिष, काउंसलिंग, व्यवसाय या गुप्त कार्यों में सफल। बचत करने वाली, स्व-रोजगार से धन कमाती हैं। परिवार प्राथमिकता, कभी नौकरी त्याग देती हैं।

महिलाओं की अनुकूलता

शादी 24-28 वर्ष में शुभ, देरी से जटिलताएं। पति-बच्चों पर गहरा नियंत्रण, मां-बहन से स्नेह। जीवन भावुक लेकिन मजबूत।

महिलाओं का स्वास्थ्य

मासिक धर्म, पेट या त्वचा समस्या पर सावधानी। रसोई में विषैले पदार्थों से बचें। ध्यान से फिट।

अश्लेषा नक्षत्र के चार चरण

प्रथम चरण (16°40'-20°00' कर्क, सिंह नवांश, सूर्य): नेतृत्वकारी, महत्वाकांक्षी।

द्वितीय चरण (20°00'-23°20' कर्क, कन्या नवांश, बुध): विश्लेषणात्मक, चतुर।

तृतीय चरण (23°20'-26°40' कर्क, वृश्चिक नवांश, मंगल): साहसी, भावुक।

चतुर्थ चरण (26°40'-30°00' कर्क, धनु नवांश, गुरु): आध्यात्मिक, रहस्यप्रिय।

सामान्य FAQ

प्रश्न: अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी कौन है?

उत्तर: बुध, बुद्धि और रहस्य देता है।

प्रश्न: अश्लेषा जातकों का भाग्य कब खुलता है?

उत्तर: 32-36 वर्ष बाद स्थिर समृद्धि।

प्रश्न: क्या अश्लेषा गंडमूल है?

उत्तर: हां, नाग शांति कराएं।

प्रश्न: शुभ रत्न क्या है?

उत्तर: पन्ना, बुधवार को धारण करें।

प्रश्न: अश्लेषा वाले धनी बनते हैं?

उत्तर: हां, चतुराई से अपार धन।

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अश्लेषा नक्षत्र: स्वास्थ्य टिप्स और चरण फल | Ashlesha Nakshatra in Hindi
Skill Astro 24 January 2026
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