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Raksha Bandhan 2026: Shubh Muhurat,

रक्षाबंधन 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त और भद्रा काल का सटीक समय। एक विशेषज्ञ ज्योतिषी से जानिए राखी बांधने की वैदिक विधि, पंचांग चार्ट और राशिनुसार उपाय।
25 August 2026 by
Soni tiwari

Raksha Bandhan 2026: Shubh Muhurat, | Skill Astro

 रक्षाबंधन 2026: शुभ मुहूर्त और सम्पूर्ण जानकारी

हर हर महादेव! नमस्कार दोस्तों, एक ज्योतिषाचार्य के रूप में जब भी मैं कुंडली या पंचांग का अध्ययन करता हूँ, तो मुझे सबसे अधिक खुशी उन पर्वों की गणना करने में होती है जो सीधे हमारे हृदय और भावनाओं से जुड़े होते हैं। रक्षाबंधन एक ऐसा ही पावन पर्व है। यह केवल रेशम का एक धागा नहीं है, बल्कि यह एक बहन के अटूट विश्वास और भाई के सुरक्षा के वचन का ब्रह्मांडीय प्रतीक है।

अक्सर मेरे यजमान मुझसे पूछते हैं कि "गुरुजी, राखी बांधने का सही समय क्या है?" ज्योतिष शास्त्र में समय (मुहूर्त) का बहुत बड़ा महत्व है। गलत समय या 'भद्रा काल' में बांधा गया रक्षासूत्र अपनी सकारात्मक ऊर्जा खो सकता है। इसलिए, आज मैं आपके लिए Raksha Bandhan 2026 की सबसे सटीक ज्योतिषीय गणना, शुभ मुहूर्त, पंचांग और वैदिक पूजा विधि लेकर आया हूँ, ताकि आपके भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को नवग्रहों का भी आशीर्वाद प्राप्त हो सके।

रक्षाबंधन 2026 कब है? 

वैदिक पंचांग की गणनाओं के अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व हर वर्ष श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। वर्ष 2026 में, श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को पड़ रही है। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और शुक्र ग्रह का होता है, जो इस बार के रक्षाबंधन को प्रेम, समृद्धि और सौहार्द के दृष्टिकोण से अत्यंत शुभ बना रहा है।

पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त 2026 की मध्य रात्रि के बाद होगा और इसका समापन 28 अगस्त की शाम को होगा। उदया तिथि के अनुसार, रक्षाबंधन का पावन पर्व 28 अगस्त 2026 को ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।

रक्षाबंधन 2026: पंचांग चार्ट 

एक ज्योतिषी होने के नाते मेरा यह कर्तव्य है कि मैं आपको ग्रहों और समय की सटीक स्थिति से अवगत कराऊँ। नीचे दिया गया पंचांग चार्ट आपको राखी बांधने के सबसे शुभ समय की जानकारी देगा:

पंचांग विवरणसमय / तिथि (28 अगस्त 2026)
त्योहार की तिथि28 अगस्त 2026, शुक्रवार
पूर्णिमा तिथि आरंभ27 अगस्त, रात्रि 01:25 बजे (लगभग)
पूर्णिमा तिथि समाप्त28 अगस्त, शाम 04:15 बजे तक
रक्षाबंधन का शुभ मुहूर्तदोपहर 12:15 बजे से शाम 08:30 बजे तक
भद्रा काल समाप्त (राखी के लिए शुभ)सुबह 11:45 बजे (भद्रा समाप्ति के बाद)
राहुकाल (राखी न बांधें)सुबह 10:30 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक

(नोट: मुहूर्त का समय आपके स्थानीय शहर के सूर्योदय और सूर्यास्त के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।)

भद्रा काल का साया: एक ज्योतिषी की चेतावनी

मेरे पास कई लोग आते हैं जो अनजाने में भद्रा काल में शुभ कार्य कर लेते हैं। शास्त्रों में स्पष्ट रूप से कहा गया है:

"भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा।"

अर्थात भद्रा काल में रक्षाबंधन और होलिका दहन कभी नहीं करना चाहिए। भद्रा सूर्य देव की पुत्री और शनि देव की बहन हैं। इनका स्वभाव अत्यंत क्रोधी और विनाशकारी माना गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण की बहन शूर्पणखा ने उसे भद्रा काल में ही राखी बांधी थी, जिसके कारण रावण के पूरे कुल का सर्वनाश हो गया।

साल 2026 में भद्रा का प्रभाव सुबह के समय रहेगा। इसलिए मेरी आपको व्यक्तिगत और ज्योतिषीय सलाह यही है कि सुबह 11:45 बजे तक राखी बांधने से बचें। दोपहर का समय अमृत चौघड़िया और शुभ मुहूर्त लेकर आ रहा है, उसी समय अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र सजाएं।

राखी बांधने की वैदिक पूजा विधि 

एक बहन जब अपने भाई को राखी बांधती है, तो वह एक प्रकार का 'रक्षा कवच' तैयार कर रही होती है। इसे पूर्ण वैदिक विधि से करें:

  1. थाली सजाएं: एक शुद्ध पीतल या चांदी की थाली में रोली (कुमकुम), अक्षत (साबुत चावल), हल्दी, दीपक, मिठाई, और पवित्र राखी रखें।

  2. दिशा का ध्यान: राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व  या उत्तर  दिशा की ओर होना चाहिए। बहन का मुख पश्चिम की ओर हो। यह दिशाएं देवताओं की दिशाएं मानी जाती हैं।

  3. तिलक और आरती: सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम और अक्षत का तिलक लगाएं। फिर उनकी आरती उतारें।

  4. रक्षा मंत्र का जाप: राखी बांधते समय यदि बहन इस वैदिक मंत्र का उच्चारण करे, तो राखी का धागा अभेद्य कवच बन जाता है:

    "येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

    तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल।।"

  5. मिठाई और आशीर्वाद: इसके बाद भाई को मिठाई खिलाएं। भाई अपनी बहन को अपनी सामर्थ्य अनुसार उपहार दें और जीवन भर उसकी रक्षा का संकल्प लें।

राशियों के अनुसार राखी का रंग 

एक पेशेवर ज्योतिषी के रूप में, मैं हमेशा सुझाव देता हूँ कि यदि आप अपने भाई की राशि के अनुसार राखी का रंग चुनती हैं, तो यह उनके जीवन में ग्रहों की शांति और सफलता लेकर आता है:

  • मेष (Aries) और वृश्चिक (Scorpio): मंगल ग्रह के प्रभाव के कारण लाल या गुलाबी रंग की राखी सबसे शुभ रहेगी।

  • वृषभ (Taurus) और तुला (Libra): शुक्र के आधिपत्य के कारण सफेद, सिल्वर या चमकीले नीले रंग की राखी बांधें।

  • मिथुन (Gemini) और कन्या (Virgo): बुध ग्रह की कृपा के लिए हरे रंग की राखी चुनें।

  • कर्क (Cancer): चंद्र देव की शांति के लिए सफेद या मोतियों वाली राखी उत्तम है।

  • सिंह (Leo): सूर्य ग्रह की मजबूती के लिए पीली, सुनहरी या नारंगी राखी बांधें।

  • धनु (Sagittarius) और मीन (Pisces): गुरु बृहस्पति के लिए पीले या हल्दी के रंग की राखी शुभ है।

  • मकर (Capricorn) और कुंभ (Aquarius): शनि देव को प्रसन्न करने के लिए गहरे नीले या रुद्राक्ष वाली राखी सबसे लाभकारी सिद्ध होगी।

  • अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

  • Q1: 2026 में रक्षाबंधन किस तारीख को मनाया जाएगा?

    उत्तर: वर्ष 2026 में रक्षाबंधन का पावन पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार के दिन मनाया जाएगा।

    Q2: क्या 2026 के रक्षाबंधन पर भद्रा का साया है?

    उत्तर: हाँ, 28 अगस्त की सुबह तक भद्रा काल रहेगा। इसलिए सुबह लगभग 11:45 बजे के बाद ही राखी बांधना ज्योतिषीय दृष्टि से सुरक्षित और शुभ रहेगा।

    Q3: राखी बांधते समय भाई का मुख किस दिशा में होना चाहिए?

    उत्तर: ज्योतिष और वास्तु के अनुसार, राखी बंधवाते समय भाई का मुख हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए, ताकि उसे सूर्य और कुबेर देव की सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त हो सके।

    Q4: अगर शुभ मुहूर्त में राखी न बांध पाएं तो क्या करें?

    उत्तर: यदि किसी कारणवश आप दोपहर के शुभ मुहूर्त में राखी नहीं बांध पाती हैं, तो प्रदोष काल (सूर्यास्त के समय) में राखी बांधना भी शास्त्रों में बहुत शुभ माना गया है। बस राहुकाल और भद्रा से बचना चाहिए।.

निष्कर्ष 

रक्षाबंधन केवल एक दिन का उत्सव नहीं है, यह एक अहसास है जो भाई-बहन को जीवन भर एक अदृश्य ऊर्जा से जोड़े रखता है। ज्योतिष शास्त्र हमें समय का ज्ञान देता है, लेकिन उस समय को अपने प्रेम और समर्पण से शुभ बनाना आपके हाथ में है। Raksha Bandhan 2026 के इस पावन अवसर पर, भद्रा काल से बचें और शुभ मुहूर्त में ही इस वैदिक परम्परा का निर्वहन करें। मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि आप सभी भाई-बहनों का प्रेम तारों और नक्षत्रों की तरह हमेशा चमकता रहे।

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