
वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हिंदू धर्म में 'अक्षय तृतीया' अथवा 'आखा तीज' के नाम से जाना जाता है। 'अक्षय' शब्द का अर्थ है वह जिसका कभी क्षय न हो, अर्थात् जो कभी नष्ट न हो। हमारे शास्त्रों में इस दिन को स्वयंसिद्ध और अबूझ मुहूर्त माना गया है। इसका अभिप्राय यह है कि इस दिन किसी भी शुभ कार्य को आरंभ करने के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन तिथि पर भगवान विष्णु के छठे अवतार भगवान परशुराम का जन्म हुआ था। इसके अतिरिक्त, भगीरथ की कठोर तपस्या के पश्चात पतितपावनी मां गंगा का धरती पर अवतरण भी इसी दिन हुआ था। महाभारत ग्रंथ के लेखन का आरंभ भी महर्षि वेदव्यास और भगवान श्री गणेश ने अक्षय तृतीया के दिन ही किया था। इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने पांडवों को अज्ञातवास के दौरान 'अक्षय पात्र' प्रदान किया था, जिसमें भोजन कभी समाप्त नहीं होता था। इन्हीं कारणों से इस दिन किए गए जप, तप, दान और स्नान का फल अनंत और अक्षय होता है।
अक्षय तृतीया 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 19 अप्रैल, रविवार के दिन मनाया जाएगा। वैदिक पंचांग के अनुसार तिथि और मुहूर्त का पूर्ण विवरण इस प्रकार है:
तृतीया तिथि का आरंभ: 19 अप्रैल 2026, प्रातः 10 बजकर 49 मिनट पर।
तृतीया तिथि का समापन: 20 अप्रैल 2026, प्रातः 07 बजकर 27 मिनट पर।
पूजा का सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त: 19 अप्रैल 2026 को प्रातः 10 बजकर 49 मिनट से दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक रहेगा। (कुल अवधि लगभग 1 घंटा 32 मिनट)
स्वर्ण व आभूषण खरीदने का शुभ समय: 19 अप्रैल को प्रातः 10 बजकर 49 मिनट से लेकर 20 अप्रैल को प्रातः 05 बजकर 51 मिनट तक खरीदारी करना अत्यंत मंगलकारी माना गया है।
अक्षय तृतीया की संपूर्ण पूजा विधि
इस दिन जगत के पालनहार भगवान श्रीनारायण (विष्णु) और धन की देवी माता लक्ष्मी की संयुक्त रूप से उपासना करने का विधान है। पूर्ण फल प्राप्ति हेतु नीचे दी गई विधि का पालन करें:
सूर्योदय से पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में उठकर किसी पवित्र नदी में स्नान करें। यदि नदी स्नान संभव न हो, तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
शुद्ध होकर पीले अथवा श्वेत रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर के पूजा स्थल को स्वच्छ कर गंगाजल छिड़कें। एक लकड़ी की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर भगवान विष्णु तथा माता लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
सर्वप्रथम प्रथम पूज्य भगवान गणेश की वंदना करें। इसके पश्चात भगवान विष्णु को पंचामृत (दूध, दही, घी, मधु और शर्करा) से स्नान कराएं।
प्रभु को पीले पुष्प, पीला चंदन, तुलसी के पत्ते और अक्षत (अखंडित चावल) अर्पित करें। ध्यान रहे कि भगवान विष्णु की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है।
माता लक्ष्मी को लाल गुलाब या कमल का पुष्प, कुमकुम और सुहाग व श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें।
नैवेद्य के रूप में जौ, सत्तू, खीर, चने की दाल और मौसमी फलों (जैसे खरबूजा, आम) का भोग लगाएं।
पूजा के दौरान 'विष्णु सहस्रनाम' और 'कनकधारा स्तोत्र' का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है।
अंत में शुद्ध घी का दीपक और धूप जलाकर आरती करें तथा परिवार की सुख-शांति व आरोग्यता के लिए प्रार्थना करें।
अक्षय तृतीया के विशेष उपाय
यदि आप जीवन में आर्थिक संकट, ऋण या किसी अन्य प्रकार की बाधा का सामना कर रहे हैं, तो इस दिन कुछ विशेष उपाय करने से आपकी सभी समस्याएं दूर हो सकती हैं:
महादान का अचूक उपाय: अक्षय तृतीया पर जल से भरा हुआ मिट्टी का कलश, सत्तू, जौ, गुड़, छाता, खड़ाऊं, और सूती वस्त्रों का दान करना चाहिए। मान्यता है कि ग्रीष्म ऋतु में उपयोग होने वाली शीतल वस्तुओं का दान करने से पितृ अत्यंत प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनकी कृपा सदैव बनी रहती है।
धन वृद्धि के लिए गोमती चक्र: माता लक्ष्मी की पूजा के समय 11 पीली कौड़ियां और 11 गोमती चक्र उनके श्री चरणों में अर्पित करें। अगले दिन इन्हें एक लाल रेशमी वस्त्र में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने वाले स्थान पर रख दें। इससे घर में कभी दरिद्रता प्रवेश नहीं करती और संचित धन में निरंतर वृद्धि होती है।
एकाक्षी नारियल की स्थापना: इस पावन अवसर पर अपने पूजा घर में 'एकाक्षी नारियल' स्थापित करें और नित्य उसकी पूजा करें। इसे साक्षात भगवती लक्ष्मी का स्वरूप माना जाता है।
पीपल के वृक्ष की पूजा: शाम के समय पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और वृक्ष की सात बार परिक्रमा करें। इससे शनि दोष, राहु-केतु की पीड़ा और पितृ दोष से तत्काल मुक्ति प्राप्त होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: अक्षय तृतीया 2026 में किस दिन पड़ रही है?
उत्तर: वर्ष 2026 में अक्षय तृतीया का पावन पर्व 19 अप्रैल, रविवार के दिन हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा।
प्रश्न: क्या अक्षय तृतीया पर वाहन या नई संपत्ति खरीद सकते हैं?
उत्तर: जी हाँ, यह एक स्वयंसिद्ध और अबूझ मुहूर्त है। इस दिन स्वर्ण, रजत, वाहन, भूमि अथवा नया भवन खरीदना भविष्य के लिए अत्यंत लाभकारी और वृद्धिदायक माना जाता है।
प्रश्न: अक्षय तृतीया के दिन मुख्य रूप से किस देवता की पूजा होती है?
उत्तर: इस दिन मुख्य रूप से भगवान विष्णु, धन की देवी माता लक्ष्मी और भगवान परशुराम की पूजा आराधना की जाती है।
प्रश्न: जो लोग सोना नहीं खरीद सकते, वे इस दिन क्या खरीदें?
उत्तर: यदि स्वर्ण आभूषण खरीदना संभव न हो, तो आप जौ (यव), पीली कौड़ी, स्फटिक का श्री यंत्र या केवल पूजा के लिए मिट्टी का एक छोटा कलश भी खरीद सकते हैं। यह भी सोने के समान ही शुभ और मंगलकारी फल प्रदान करता है।
निष्कर्ष
अक्षय तृतीया भारतीय संस्कृति का एक ऐसा देदीप्यमान पर्व है, जो हमें धर्म, कर्म और दान की महत्ता सिखाता है। यह दिन केवल भौतिक संपदा एकत्र करने का नहीं, अपितु आध्यात्मिक ऊर्जा संचय करने का भी महापर्व है। इस दिन सच्चे हृदय से की गई प्रार्थना, किया गया दान और निष्काम भाव से की गई सेवा का पुण्य कभी क्षीण नहीं होता। वर्ष 2026 में 19 अप्रैल को पड़ने वाली इस अक्षय तृतीया पर अपनी क्षमता के अनुसार दान-पुण्य अवश्य करें और माता लक्ष्मी तथा भगवान विष्णु की आराधना कर अपने जीवन को सुखमय, समृद्ध और अज्ञानता के अंधकार से मुक्त बनाएं।