परिचय: नाड़ी दोष क्या है?
वैदिक ज्योतिष में विवाह के संदर्भ में नाड़ी दोष को सभी दोषों में सबसे गंभीर और विनाशकारी माना जाता है। कुंडली मिलान की अष्टकूट पद्धति (जो 36 गुणों पर आधारित है) में नाड़ी को सर्वोच्च महत्व दिया जाता है—यह अकेला 8 गुण का मूल्य रखता है। यह एक सूचक है कि नाड़ी दोष विवाह के लिए कितना महत्वपूर्ण है। नाड़ी दोष तब बनता है जब वर और वधु दोनों की कुंडली में एक ही नाड़ी होती है। यानी यदि दोनों की नाड़ी आदि हो, दोनों की नाड़ी मध्य हो, या दोनों की नाड़ी अंत्य हो, तो यह दोष लगता है।
"नाड़ी" शब्द का अर्थ है "नाड़ी" या "पल्स"—जो शरीर की ऊर्जा प्रवाह को दर्शाती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, प्रत्येक नक्षत्र (lunar mansion) एक नाड़ी से जुड़ा होता है। नाड़ी दोष का अर्थ है कि दोनों साथी का ऊर्जा प्रवाह एक जैसा है, जो आयुर्वेद के अनुसार एक जैसी वात, पित्त या कफ प्रकृति को दर्शाता है। यह समानता विवाह में भारी समस्याएं पैदा करती है क्योंकि एक ही तरह की शारीरिक और मानसिक प्रकृति के दो लोग एक-दूसरे को समझ नहीं पाते, आकर्षण नहीं होता, और संतान संबंधी समस्याएं आती हैं।
यदि नाड़ी दोष को नज़रअंदाज़ किया जाए और बिना किसी उपाय के विवाह किया जाए, तो यह दोष वैवाहिक जीवन को बर्बाद कर सकता है। महर्षि वशिष्ठ ने अपने ग्रंथों में लिखा है कि नाड़ी दोष होने पर दंपति के जीवन में अकाल मृत्यु, संतान समस्याएं, स्वास्थ्य रोग, और तलाक तक की संभावना बनी रहती है। इसीलिए भारतीय विवाह परंपरा में कुंडली मिलान को सर्वोपरि महत्व दिया गया है।
नाड़ी के तीन प्रकार और उनका महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नाड़ी तीन प्रकार की होती हैं। हर नाड़ी का अपना विशेषता है, अपना ऊर्जा स्वरूप है, और हर नाड़ी के 9-10 नक्षत्र होते हैं। इन तीनों नाड़ियों को समझना नाड़ी दोष को समझने के लिए अत्यंत आवश्यक है। प्रत्येक नाड़ी का अपना व्यक्तित्व है, अपनी विशेषताएं हैं, और एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं।
1. आदि नाड़ी (Adi Nadi) – पिंगला नाड़ी (वायु तत्व)
आदि नाड़ी को वायु तत्व से जोड़ा जाता है और इसे "पिंगला नाड़ी" भी कहते हैं। इस नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह नीचे से ऊपर की ओर (पैरों से सिर की ओर) होता है। आदि नाड़ी वाले व्यक्ति बहुत ऊर्जावान, सक्रिय, गतिशील और तेज़ मेज़ाज़ के होते हैं। ये लोग जल्दी निर्णय लेते हैं, साहसी होते हैं, और आमतौर पर नेतृत्व की प्रवृत्ति रखते हैं। आदि नाड़ी के नक्षत्र हैं: अश्विनी, कृतिका, समरण, कृत्तिका, आदि।
आदि नाड़ी वाले दोनों लोगों का विवाह करने पर उनमें भारी संघर्ष होता है। क्योंकि दोनों ही बहुत सक्रिय, आत्मनिर्भर, और अपने निर्णयों में दृढ़ होते हैं। ऐसे में घर में दो नेता होते हैं—परिणाम में झगड़े, अनबन, और अलगाववाद का खतरा होता है। महर्षि वराहमिहिर के अनुसार, यदि वर-वधु दोनों की आदि नाड़ी है, तो उनका विवाह अधिक दिनों तक टिकता नहीं, और तलाक की गंभीर संभावना रहती है।
2. मध्य नाड़ी (Madhya Nadi) – ब्रह्मनाड़ी (अग्नि तत्व)
मध्य नाड़ी को अग्नि तत्व से जुड़ी माना जाता है और इसे "ब्रह्मनाड़ी" भी कहते हैं। इस नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह दोनों दिशाओं में (नीचे से ऊपर तथा ऊपर से नीचे) होता है। मध्य नाड़ी वाले व्यक्ति संतुलित, बुद्धिमान, तर्क-संगत और भावनात्मक रूप से स्थिर होते हैं। ये लोग दोनों पक्षों को समझते हैं, लेकिन कभी-कभी आंतरिक द्वंद्व और तनाव का सामना करते हैं।
मध्य नाड़ी वाले दोनों लोगों का विवाह यदि किया जाए, तो महर्षि वशिष्ठ के अनुसार दंपति के सदस्यों में से एक या दोनों की आकस्मिक मृत्यु की बहुत अधिक संभावना रहती है। कहा जाता है कि इस संयोजन में दोनों की आंतरिक ऊर्जा एक-दूसरे को नष्ट कर देती है, जिससे गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं, दुर्घटनाएं, या विषबीज संबंधी समस्याएं आती हैं। यह नाड़ी संयोजन अत्यंत घातक माना जाता है।
3. अंत्य नाड़ी (Antya Nadi) – ईड़ा नाड़ी (जल तत्व)
अंत्य नाड़ी को जल तत्व से जोड़ा जाता है और इसे "ईड़ा नाड़ी" भी कहते हैं। इस नाड़ी में ऊर्जा का प्रवाह धीमा, शांत और संतुलित होता है। अंत्य नाड़ी वाले व्यक्ति शांत, विचारशील, भावनात्मक, सहानुभूतिपूर्ण और कला प्रेमी होते हैं। ये लोग अंतर्मुखी प्रवृत्ति के होते हैं, गहरे विचार रखते हैं, और भावनाओं को महत्व देते हैं।
अंत्य नाड़ी वाले दोनों लोगों का विवाह करने पर भी समस्याएं आती हैं, लेकिन ये समस्याएं अलग तरह की होती हैं। ऐसे दंपति का जीवन सुखद नहीं होता, दोनों में भावनात्मक दूरी रहती है, कोई प्रेम या आकर्षण नहीं होता, बल्कि एक-दूसरे से अलग रहने की चाहत होती है। ऐसे विवाह आजीवन दुःख का स्रोत बन जाते हैं। संतान भी कमजोर, बीमार, या मानसिक रूप से कमजोर जन्म लेती है।
नाड़ी दोष कब और कैसे बनता है?
नाड़ी दोष का निर्माण प्रक्रिया बहुत सरल है, लेकिन इसके परिणाम बहुत गंभीर हैं। नाड़ी दोष तभी बनता है जब विवाह के लिए मिलाई जा रही कुंडलियों में वर और वधु दोनों की नाड़ी एक ही प्रकार की हो। नाड़ी का निर्धारण जन्म नक्षत्र (birth nakshatra) से होता है। हर नक्षत्र की एक निर्धारित नाड़ी होती है। यदि वर का नक्षत्र आदि नाड़ी वाली राशि में है, और वधु का नक्षत्र भी आदि नाड़ी वाली राशि में है, तो नाड़ी दोष बनता है।
अष्टकूट मिलान प्रणाली में जब नाड़ी दोष नहीं होता है, तो दोनों को 8 गुण मिलते हैं। लेकिन जब नाड़ी दोष होता है, तो दोनों को 0 गुण मिलते हैं। यह कुल 36 गुणों में से 8 गुणों की हानि है, जिसे आमतौर पर कोई भी गुण पूरा नहीं कर सकता। इसलिए नाड़ी दोष को सबसे महत्वपूर्ण और गंभीर दोष माना जाता है।
उदाहरण के लिए: यदि वर का जन्म नक्षत्र "कृतिका" है (जो आदि नाड़ी में आता है) और वधु का जन्म नक्षत्र "कृत्तिका" भी है (जो भी आदि नाड़ी में आता है), तो नाड़ी दोष बनता है। इसी तरह अगर दोनों की नाड़ी "मध्य" या "अंत्य" है, तब भी दोष बनता है।
नाड़ी दोष के नकारात्मक प्रभाव: विवाह और स्वास्थ्य पर गंभीर असर
नाड़ी दोष के प्रभाव बहुत व्यापक और गंभीर हैं। यह दोष केवल मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक समस्याएं नहीं पैदा करता, बल्कि शारीरिक स्वास्थ्य, संतान की गुणवत्ता, और दीर्घायु को भी प्रभावित करता है। आयुर्वेद के अनुसार, नाड़ी हमारे शरीर की जीवन ऊर्जा है। जब दोनों पति-पत्नी की नाड़ी एक जैसी हो, तो उनकी जीवन ऊर्जा एक जैसी होती है, जिससे न केवल शारीरिक असंगति बनती है, बल्कि उनके संतान का भी गठन कमजोर होता है। आइए नाड़ी दोष के विभिन्न प्रभावों को विस्तार से समझें।
A. वैवाहिक जीवन पर प्रभाव:
नाड़ी दोष वाले दंपति के विवाह पश्चात का जीवन अत्यंत कष्टमय और तनावपूर्ण होता है। ऐसे दंपति में भारी असंगति होती है। आदि नाड़ी दोष वाले दंपति को तलाक-अलगाववाद का सामना करना पड़ता है क्योंकि दोनों की प्रवृत्ति एक जैसी होने से एक-दूसरे को समझने में असमर्थता आती है। उन्हें एक-दूसरे में आकर्षण नहीं होता, बल्कि विकर्षण होता है। मध्य नाड़ी दोष में दंपति को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है, और दुर्घटना या आकस्मिक मृत्यु की बहुत अधिक संभावना रहती है। अंत्य नाड़ी दोष में विवाह तो रहता है, लेकिन कोई प्रेम, आकर्षण या मानसिक समझदारी नहीं होती। ऐसे विवाह आजीवन दुःख का कारण बन जाते हैं।
B. संतान संबंधी समस्याएं:
नाड़ी दोष का सबसे भयावह प्रभाव संतान पर पड़ता है। नाड़ी दोष वाले दंपति को संतान की चाहत पूरी नहीं होती। बांझपन, बार-बार गर्भपात, या नवजात की मृत्यु की समस्याएं आती हैं। यदि संतान जन्म भी ले, तो वह कमजोर, बीमार, विकलांग, मानसिक रूप से पिछड़ी, या दुर्बल होती है। ऐसी संतान आजीवन समस्याओं का सामना करती है। माना जाता है कि नाड़ी दोष वाले दंपति की संतान को "आनुवंशिक विकार" (genetic disorder) होने की अधिक संभावना होती है।
C. स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं:
नाड़ी दोष से दंपति को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। मध्य नाड़ी दोष में तो दुर्घटना, आकस्मिक रोग, या मृत्यु की आशंका इतनी अधिक होती है कि कई ज्योतिषी सलाह देते हैं कि ऐसे विवाह न किए जाएं। शेष दोषों में दंपति को दीर्घकालीन रोग जैसे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, या पाचन संबंधी समस्याएं आती हैं।
D. आर्थिक और सामाजिक समस्याएं:
नाड़ी दोष के कारण दंपति के बीच लगातार झगड़े होते हैं, जिससे घर का माहौल विषाक्त रहता है। इसका सीधा असर उनके करियर, आजीविका, और आर्थिक स्थिति पर पड़ता है। भी आर्थिक नुकसान हो सकता है। सामाजिक जीवन भी प्रभावित होता है।
E. मानसिक और भावनात्मक प्रभाव:
नाड़ी दोष वाले दंपति को मानसिक तनाव, अवसाद, निराशा, और आत्महत्या का खतरा बना रहता है। विवाह की शुरुआत में ही यदि महसूस हो जाए कि पार्टनर में कोई समझदारी, प्रेम, या आकर्षण नहीं है, तो यह भावनात्मक दर्द बहुत गहरा होता है।
नाड़ी दोष में विवाह संभव है या नहीं? संशोधन और निरस्तीकरण नियम
यह एक बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न है जो प्रत्येक परिवार का सामना करता है। परंपरागत ज्योतिष शास्त्र में कहा जाता है कि नाड़ी दोष होने पर विवाह नहीं करना चाहिए। लेकिन आधुनिक ज्योतिष और व्यावहारिक अनुभव ने कुछ अपवाद निकाले हैं। कई ज्योतिषी ऐसे नियम बताते हैं जिनके तहत नाड़ी दोष को निरस्त किया जा सकता है या कम किया जा सकता है।
नाड़ी दोष निरस्ती के नियम:
1. विभिन्न राशि, समान नक्षत्र: यदि वर और वधु की नक्षत्र (nakshatra) तो एक ही है (जिससे नाड़ी दोष बनता है), लेकिन राशि (zodiac sign) अलग-अलग हो, तो नाड़ी दोष निरस्त हो सकता है। उदाहरण के लिए, यदि दोनों का नक्षत्र "कृतिका" है, लेकिन एक की राशि "मेष" है और दूसरे की "वृषभ" है, तो दोष कम हो जाता है।
2. समान राशि, विभिन्न नक्षत्र: इसके विपरीत, यदि दोनों की राशि तो एक ही है, लेकिन नक्षत्र अलग-अलग हो, तब भी नाड़ी दोष निरस्त हो सकता है। यानी एक ही राशि में अलग-अलग नक्षत्र होने से नाड़ी दोष का प्रभाव नहीं रहता।
3. कुल गुण 18 से अधिक: यदि कुल गुण 36 में से 18 या उससे अधिक मिल रहे हों, तो ज्योतिषी सलाह दे सकते हैं कि नाड़ी दोष के बावजूद विवाह किया जा सकता है। नाड़ी दोष के 0 गुण को अन्य गुणों की श्रेष्ठता से ऑफसेट किया जा सकता है।
4. शुक्र की प्रबल स्थिति: यदि दोनों की कुंडली में शुक्र बहुत प्रबल है, तो यह विवाह को सफल बना सकता है। शुक्र प्रेम, आकर्षण, और वैवाहिक सुख का कारक है।
5. राहु-केतु की अनुकूल स्थिति: राहु-केतु की अनुकूल स्थिति नाड़ी दोष को कम कर सकती है।
कब विवाह नहीं करना चाहिए?
जब मध्य नाड़ी दोष हो, तो आमतौर पर विवाह की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि इसमें मृत्यु की आशंका बहुत अधिक रहती है। ऐसे में कुंडली में किसी विशेष योग (जैसे राज योग, धन योग, आदि) की प्रबल स्थिति के बिना विवाह न करने की सलाह दी जाती है।
नाड़ी दोष के रामबाण उपाय
A. नाड़ी दोष निवारण पूजा (सबसे महत्वपूर्ण)
नाड़ी दोष निवारण पूजा विवाह से पहले किया जाना चाहिए। इस पूजा को एक अनुभवी पंडित द्वारा निर्दिष्ट मंदिर में करवाया जाता है। वाराणसी, उज्जैन, त्रिंबकेश्वर, हरिद्वार या काशी विश्वनाथ मंदिर में इस पूजा का विशेष महत्व है।
पूजा में निम्नलिखित शामिल होते हैं:
नवग्रह पूजन – नौ ग्रहों की पूजा
हवन/यज्ञ – अग्नि पूजन
रुद्राभिषेक – शिवलिंग पर दूध और जल का अभिषेक
मंत्र जाप – विभिन्न शक्तिशाली मंत्रों का जाप
B. विष्णु विवाह (Vishnu Vivah) – सबसे प्रभावी उपाय
यह सबसे प्राचीन और प्रभावी उपाय है। इस विधि में वधु का विवाह पहले भगवान विष्णु (या भगवान कृष्ण) से किया जाता है, फिर वर से। मान्यता है कि भगवान विष्णु विवाह के देवता हैं, और जब वधु का विवाह विष्णु से हो जाता है, तो नाड़ी दोष का अनिष्ट प्रभाव समाप्त हो जाता है।
विष्णु विवाह की प्रक्रिया:
एक ब्राह्मण (पुरोहित) को विष्णु का प्रतीक माना जाता है
वधु का विवाह इस ब्राह्मण से किया जाता है
फिर (प्रतीकात्मक रूप से) वधु का वास्तविक विवाह वर से किया जाता है
इस विधि को "कन्यादान" से पहले किया जाता है
हालांकि यह आजकल कम होता है, लेकिन जहां नाड़ी दोष बहुत गंभीर हो, वहां यह विधि की सलाह दी जाती है।
C. मंत्र जाप
1. महामृत्युंजय मंत्र (सबसे महत्वपूर्ण):
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
दोनों (वर-वधु) को विवाह से पहले 108 बार (या 1,000 बार) इस मंत्र का जाप करना चाहिए।
विवाह के बाद भी नियमित रूप से इस मंत्र का जाप करें।
यह मंत्र सभी रोगों को दूर करता है और दीर्घायु प्रदान करता है।
2. ओम नमः शिवाय:
प्रतिदिन 108 बार इस मंत्र का जाप करें।
यह मंत्र मन की शांति और समझदारी को बढ़ाता है।
3. गायत्री मंत्र:
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम् भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।
सुबह-शाम 108 बार जाप करें।
4. श्रीं हीं श्रीं (लक्ष्मी मंत्र):
विवाहित दंपति के लिए आर्थिक समृद्धि और वैवाहिक सुख के लिए।
5. ओम नमो भगवते वासुदेवाय:
भगवान कृष्ण/विष्णु का मंत्र, विवाह के देवता को समर्पित।
D. पूजा और धार्मिक कार्य
1. शिव मंदिर में नियमित पूजा:
सोमवार को शिवलिंग पर दूध और जल से अभिषेक करें।
प्रदोष काल में विशेष पूजा करें।
2. विष्णु/कृष्ण मंदिर में पूजा:
तुलसी के पौधे के पास दीप जलाएं।
भगवान विष्णु को मिठाई और फूलों का भोग लगाएं।
3. दुर्गा सप्तशती का पाठ:
शक्तिशाली मंत्रों के माध्यम से नकारात्मकता को दूर करें।
प्रतिदिन या सप्ताह में कम से कम एक बार पाठ करें।
4. नवग्रह पूजन:
नौ ग्रहों की पूजा करें, विशेषकर चंद्र और शुक्र पर ध्यान दें।
E. दान और सेवा
नाड़ी दोष को दूर करने के लिए दान और सेवा अत्यंत महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि पूर्वजन्म के कर्मों का प्रभाव ही नाड़ी दोष है, और दान से उन कर्मों का शुद्धिकरण होता है।
विशेष दान:
1. वजन के बराबर अन्न दान:
वर और वधु दोनों को अपने वजन के बराबर गेहूं, चना दाल, या अन्य अनाज दान करना चाहिए।
यह सबसे प्रभावी दान माना जाता है।
2. गौ दान (गाय का दान):
यदि संभव हो तो गाय का दान करें, या गाय को गुड़, घास, और दूध खिलाएं।
3. ब्राह्मणों को भोजन:
13 ब्राह्मणों को भोजन कराएं।
विशेषकर विवाह से पहले यह दान करें।
4. अन्य दान:
गरीबों को कपड़े दान करें
शिक्षार्थियों को किताबें दान करें
मंदिर को घी, तेल, फूल दान करें
आश्रमों में भोजन दान करें
F. सामाजिक और मानसिक सुधार
नाड़ी दोष के उपाय में सबसे महत्वपूर्ण है दंपति में सहानुभूति, समझदारी, और प्रेम का विकास। बाहरी उपायों का कोई मतलब नहीं अगर दंपति एक-दूसरे को समझना न चाहे।
महत्वपूर्ण बातें:
एक-दूसरे की भावनाओं को समझें
संवाद और बातचीत बढ़ाएं
एक-दूसरे के गुणों को स्वीकार करें
कभी-कभी विवाहित दंपति को विवाह परामर्श (marriage counseling) की भी जरूरत हो सकती है
G. अन्य उपाय
1. आंवले का पेड़ लगाएं:
घर में आंवले का पेड़ लगाना और उसकी देखभाल करना शुभ माना जाता है।
2. पीपल को जनेऊ पहनाएं:
सोमवती अमावस्या को पीपल को जनेऊ पहनाएं।
3. तांत्रिक उपाय:
कुछ मामलों में तांत्रिक विधि से भी नाड़ी दोष को शांत किया जा सकता है, लेकिन यह किसी अनुभवी तांत्रिक की निगरानी में ही करना चाहिए।
4. यंत्र और क्रिस्टल:
विष्णु यंत्र या विवाह यंत्र घर में रखें।
क्वार्ट्ज क्रिस्टल को पूजा स्थान पर रखें।
5. स्वर्ण और रत्न:
सोना, हीरा, या पन्ना धारण करना भी शुभ माना जाता है।
6. दिव्य स्नान:
गंगा स्नान, या किसी तीर्थ स्थान पर स्नान करें।
नदी में पवित्र डुबकी लगाएं।
नाड़ी दोष: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या नाड़ी दोष वाले दंपति को कभी खुशहाली नहीं मिल सकती?
नहीं, यह सच नहीं है। सही उपाय, समझदारी, और प्रेम से नाड़ी दोष के प्रभाव को कम किया जा सकता है। कई दंपति नाड़ी दोष के बावजूद खुशहाल जीवन जीते हैं।
Q2: क्या नाड़ी दोष निरस्त हो सकता है?
हां, कई परिस्थितियों में नाड़ी दोष को निरस्त किया जा सकता है। विभिन्न राशि, समान नक्षत्र; या समान राशि, विभिन्न नक्षत्र—ऐसे में दोष निरस्त हो सकता है।
Q3: नाड़ी दोष का निवारण करने में कितना समय लगता है?
यदि विवाह से पहले उचित पूजा और मंत्र जाप किया जाए, तो लाभ तुरंत देखने को मिलता है। लेकिन आजीवन सजगता और दान-पुण्य आवश्यक है।
Q4: विष्णु विवाह वास्तव में प्रभावी है?
हां, विष्णु विवाह को बहुत प्रभावी माना जाता है। यह प्राचीन काल से किया जाता आ रहा है और हजारों दंपति ने इससे लाभ उठाया है।
Q5: यदि नाड़ी दोष को अनदेखा किया जाए तो क्या होगा?
बिना उपाय के नाड़ी दोष वाले दंपति को वैवाहिक जीवन में गंभीर समस्याएं आती हैं—संतान संबंधी समस्याएं, स्वास्थ्य समस्याएं, और अलगाववाद का खतरा।
Q6: क्या आदि, मध्य, और अंत्य नाड़ी में अंतर है?
हां, तीनों नाड़ियों के अलग-अलग प्रभाव हैं। मध्य नाड़ी दोष सबसे खतरनाक माना जाता है।
Q7: क्या दोष होने पर महामृत्युंजय मंत्र काफी है?
महामृत्युंजय मंत्र बहुत प्रभावी है, लेकिन पूर्ण निवारण के लिए पूजा, दान, और सामाजिक सुधार भी आवश्यक हैं।
Q8: क्या ज्योतिषी के बिना घर पर ही उपाय किया जा सकता है?
हां, मंत्र जाप, दान, और भक्ति घर पर ही किए जा सकते हैं। लेकिन गंभीर मामलों में किसी अनुभवी ज्योतिषी की सलाह अवश्य लें।
निष्कर्ष: नाड़ी दोष—चिंता नहीं, समाधान है
नाड़ी दोष एक गंभीर दोष है, लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं है। विवाह को अनिवार्य रूप से रद्द करने का कारण भी नहीं है। सही ज्योतिषी के परामर्श में, उचित पूजा और मंत्र जाप के द्वारा, और सबसे महत्वपूर्ण रूप से, दंपति में प्रेम, विश्वास, और समझदारी के साथ, नाड़ी दोष को सफलतापूर्वक संभाला जा सकता है।
आधुनिक समय में हजारों दंपति नाड़ी दोष के साथ खुशहाल विवाह जीवन जी रहे हैं। महत्वपूर्ण यह है कि दोष को समझा जाए, उचित सावधानियां बरती जाएं, और नियमित रूप से आध्यात्मिक प्रयास किए जाएं।
SkillAstro पर हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषी आपकी और आपके जीवनसाथी की कुंडली का विस्तृत विश्लेषण कर सकते हैं, नाड़ी दोष की गंभीरता बता सकते हैं, और व्यक्तिगत उपाय सुझा सकते हैं। याद रखें कि हर दोष का समाधान है—बस सही मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प की जरूरत है।
याद रखें: "विवाह केवल दो शरीरों का मिलन नहीं, बल्कि दो आत्माओं का संयोग है। सही प्रयास से, यह संयोग हमेशा सुखद बनाया जा सकता है।"
