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ग्रहण दोष क्या है? कारण, प्रकार, लक्षण, विवाह पर प्रभाव और संपूर्ण निवारण उपाय | Grahan Dosh in Hindi

ग्रहण दोष (Grahan Dosh) सूर्य/चंद्र-राहु/केतु की युति से बनता है। जानें 4 प्रकार, विवाह-संतान-स्वास्थ्य पर प्रभाव, निरस्तीकरण नियम, और सूर्य मंत्र, चंद्र पूजा, गायत्री जाप जैसे प्रभावी उपाय।
3 January 2026 by
Ajeet Verma

ग्रहण दोष क्या है? कारण, प्रकार, लक्षण, विवाह पर प्रभाव और संपूर्ण निवारण उपाय | Grahan Dosh in Hindi | Skill Astro

परिचय: ग्रहण दोष क्या है?

वैदिक ज्योतिष में ग्रहण दोष एक अत्यंत गंभीर और विनाशकारी दोष माना जाता है। "ग्रहण" शब्द संस्कृत से आया है, जिसका अर्थ है "खाना" या "ग्रहण करना"—जो यह दर्शाता है कि राहु और केतु (छाया ग्रह) किस प्रकार सूर्य और चंद्रमा की शुभता को खा (नष्ट) देते हैं। ग्रहण दोष तब बनता है जब किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में सूर्य या चंद्रमा राहु या केतु के साथ एक ही भाव में होते हैं, या जब व्यक्ति का जन्म सूर्य ग्रहण या चंद्र ग्रहण के दौरान होता है।​

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, सूर्य और चंद्रमा सबसे शक्तिशाली ग्रह हैं। सूर्य जीवन शक्ति, आत्मविश्वास, व्यक्तित्व और पितृ ऊर्जा का प्रतीक है, जबकि चंद्रमा मन, भावनाएं, मानसिक शांति और मातृ ऊर्जा का प्रतीक है। जब राहु और केतु (दोनों ही ग्रहण के स्वामी हैं) इन दोनों महान ग्रहों को ग्रस्त करते हैं, तो व्यक्ति के जीवन में भारी असंतुलन, मानसिक अशांति, स्वास्थ्य समस्याएं, और परिवार में विनाश आता है। यह दोष न केवल व्यक्तिगत जीवन को प्रभावित करता है, बल्कि पारिवारिक सुख, विवाह, संतान, और आर्थिक स्थिति को भी गहरी चोट पहुंचाता है।​

महर्षि वशिष्ठ और परशर ने अपने ग्रंथों में लिखा है कि ग्रहण दोष वाले जातक का जीवन लगातार कष्टों से भरा होता है, और यदि उचित उपाय न किए जाएं, तो यह दोष पूरी पीढ़ी को प्रभावित कर सकता है। इसीलिए ग्रहण दोष को सभी दोषों में सबसे खतरनाक माना जाता है।​

ग्रहण दोष कैसे बनता है? कारण और निर्माण प्रक्रिया

ग्रहण दोष के निर्माण के लिए कई परिस्थितियां जिम्मेदार हैं। आइए समझते हैं कि कैसे यह गंभीर दोष कुंडली में प्रवेश करता है और अपना विनाशकारी कार्य करता है।​

A. सूर्य या चंद्रमा पर राहु-केतु की सीधी युति

सबसे प्रबल ग्रहण दोष तब बनता है जब सूर्य या चंद्रमा सीधे रूप से राहु या केतु के साथ एक ही भाव में (conjunction में) होते हैं। यह योग बहुत घातक माना जाता है क्योंकि राहु-केतु सूर्य-चंद्र की पूरी ऊर्जा को अवशोषित कर लेते हैं। यह ऐसा है जैसे चंद्रमा को पृथ्वी की छाया पूरी तरह से ढक ले—कोई प्रकाश नहीं, केवल अंधकार।​

B. ग्रहण के समय जन्म

यदि किसी व्यक्ति का जन्म सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) या चंद्र ग्रहण (Lunar Eclipse) के समय होता है, तो वह स्वाभाविक रूप से ग्रहण दोष का वाहक बन जाता है। इस दौरान राहु और केतु की ऊर्जा बहुत तीव्र होती है, और जो व्यक्ति इस समय पृथ्वी पर आता है, वह इस नकारात्मक ऊर्जा को अपने साथ लेकर आता है।​

C. कुंडली के विभिन्न भावों में ग्रहण दोष

ग्रहण दोष का प्रभाव उस भाव पर निर्भर करता है जहां यह बनता है। प्रत्येक भाव का अपना महत्व है और प्रत्येक भाव में दोष के अलग प्रभाव होते हैं।​

  • प्रथम भाव में (लग्न में): व्यक्तित्व, शारीरिक स्वास्थ्य, आत्मविश्वास प्रभावित होते हैं

  • द्वितीय भाव में: आर्थिक स्थिति, परिवार से विवाद, भाषा में कमजोरी

  • पंचम भाव में: संतान संबंधी समस्याएं, शिक्षा में बाधा, बुद्धि पर प्रभाव

  • सप्तम भाव में: विवाह में देरी, वैवाहिक जीवन में कलह, अलगाववाद

  • आठवां भाव में: आकस्मिक दुर्घटनाएं, दीर्घायु में कमी, पारिवारिक संकट

  • बारहवां भाव में: मानसिक रोग, नींद की समस्या, व्यय में वृद्धि​

ग्रहण दोष के प्रकार: चार गंभीर संयोजन

ग्रहण दोष के बनने के लिए चार मुख्य ग्रहीय संयोजन हैं। हर संयोजन का अपना विशिष्ट प्रभाव है, अपनी गंभीरता है।​

1. पूर्ण सूर्य ग्रहण दोष (Purna Surya Grahan Dosh) – सूर्य-राहु युति

यह तब बनता है जब सूर्य और राहु एक ही भाव में होते हैं। यह सूर्य ग्रहण का पूर्ण योग है (जैसे वास्तविक सूर्य ग्रहण में सूर्य पूरी तरह से छिप जाता है)। इस दोष के परिणाम बहुत गंभीर हैं क्योंकि सूर्य जीवन का केंद्रीय प्रकाश है।​

पूर्ण सूर्य ग्रहण दोष के प्रभाव:
  • आत्मविश्वास की कुल कमी

  • नेतृत्व क्षमता का विनाश

  • पितृ संबंधों में भारी तनाव या पिता से विरोध

  • सत्ता के आंकड़ों के साथ समस्याएं (सरकारी अधिकारी, मालिक, शिक्षक)

  • व्यक्तित्व विकार

  • सार्वजनिक अपमान और प्रतिष्ठा की हानि

  • आंखों संबंधी समस्याएं (ज्योतिष में सूर्य को आंखें कहा जाता है)

  • गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं—हृदय रोग, हड्डियों की कमजोरी​

2. आंशिक सूर्य ग्रहण दोष (Partial Surya Grahan Dosh) – सूर्य-केतु युति

जब सूर्य और केतु एक ही भाव में होते हैं, तो यह आंशिक सूर्य ग्रहण दोष बनता है। इस दोष में सूर्य पूरी तरह नष्ट नहीं होता, लेकिन उसकी ताकत काफी हद तक कम हो जाती है।​

आंशिक सूर्य ग्रहण दोष के प्रभाव:
  • आध्यात्मिक भटकाव और धर्म से विमुखता

  • आत्मविश्वास में कमी (पूर्ण नहीं, लेकिन महत्वपूर्ण कमी)

  • स्वास्थ्य समस्याएं—विशेषकर आंखें, हृदय

  • करियर में ठहराव और सीमित सफलता

  • पारिवारिक कलह

  • महत्वपूर्ण निर्णयों में भ्रम​

3. पूर्ण चंद्र ग्रहण दोष (Purna Chandra Grahan Dosh) – चंद्र-राहु युति

जब चंद्रमा और राहु एक ही भाव में होते हैं, तो यह पूर्ण चंद्र ग्रहण दोष बनता है। चंद्रमा मन और भावनाओं का प्रतीक है, इसलिए इस दोष का मनोवैज्ञानिक प्रभाव सबसे गहरा होता है।​

पूर्ण चंद्र ग्रहण दोष के प्रभाव:
  • गंभीर मानसिक अवसाद (Depression)

  • भावनात्मक अस्थिरता और उग्र स्वभाव

  • नींद संबंधी गंभीर समस्याएं (अनिद्रा)

  • मातृ संबंधों में दूरी या विवाद (माता से संबंध खराब)

  • माता के स्वास्थ्य में समस्याएं

  • बार-बार असफलताएं

  • मानसिक व्याधि और तनाव

  • सामाजिक अलगाववाद

  • निर्णय लेने में भ्रम​

4. आंशिक चंद्र ग्रहण दोष (Partial Chandra Grahan Dosh) – चंद्र-केतु युति

जब चंद्रमा और केतु एक ही भाव में होते हैं, तो यह आंशिक चंद्र ग्रहण दोष बनता है। यह सबसे कम गंभीर ग्रहण दोष माना जाता है, लेकिन फिर भी काफी समस्याग्रस्त है।​

आंशिक चंद्र ग्रहण दोष के प्रभाव:
  • पारिवारिक कलह और अशांति

  • नींद की समस्याएं (लेकिन पूर्ण नहीं)

  • सामान्य चिंता और बेचैनी

  • भावनात्मक दूरी परिवार से

  • सीमित मानसिक अशांति​

ग्रहण दोष के व्यापक लक्षण और संकेत

ग्रहण दोष के लक्षण बहुत स्पष्ट होते हैं, लेकिन अक्सर लोग इन्हें सामान्य समस्या मान लेते हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ग्रहण दोष की पहचान कैसे की जाए।​

A. मानसिक और भावनात्मक लक्षण:

ग्रहण दोष सबसे पहले और सबसे ज्यादा मन को प्रभावित करता है। चंद्र ग्रहण दोष में यह प्रभाव सबसे गंभीर है।

  • अवसाद और निराशा: लगातार उदासी, भविष्य से निराशा, आत्महत्या की विचार

  • मानसिक अस्थिरता: मन का न ठहरना, भावनाओं का अनियंत्रित होना

  • चिंता और बेचैनी: अकारण चिंता, घबराहट, हमेशा तनाव में रहना

  • आत्मविश्वास की कमी: खुद से संदेह, हीन भावना

  • भ्रम और संदेह: सही-गलत का फैसला न कर पाना, हर निर्णय में संदेह

  • भावनात्मक दूरी: अपने प्रिय लोगों से भी अलग-थलग महसूस करना​

B. शारीरिक और स्वास्थ्य संबंधी लक्षण:

  • नींद संबंधी समस्याएं: अनिद्रा (नींद न आना) या अत्यधिक नींद

  • कमजोर प्रतिरक्षा तंत्र: बार-बार बीमार पड़ना, संक्रमण का खतरा

  • आंखों की समस्याएं: कमजोर दृष्टि, आंखों में दर्द, चश्मा की जरूरत

  • हृदय रोग: असामान्य दिल की धड़कन, सीने में दर्द

  • सिरदर्द: लगातार माइग्रेन और सिरदर्द

  • पाचन समस्याएं: अपच, कब्ज, एसिडिटी

  • दुर्घटनाएं: बार-बार चोट लगना, दुर्घटनाएं होना (विशेषकर जब ग्रहण काल में जन्म हो)​

C. पारिवारिक और सामाजिक लक्षण:

  • माता से संबंध में समस्या: माता से अलगाववाद, माता के साथ लड़ाई, माता के स्वास्थ्य में समस्या

  • पिता से विरोध: पिता के साथ संबंध खराब, पिता का अनुमोदन न मिलना

  • पारिवारिक कलह: परिवार में लगातार झगड़े, तनाव, अशांति

  • सामाजिक अलगाववाद: समाज में अकेला महसूस करना, बदनामी

  • दोस्ती में समस्या: दोस्तों से अलगाववाद, विश्वास टूटना​

D. करियर और आर्थिक लक्षण:

  • करियर में ठहराव: नौकरी में पदोन्नति न मिलना, नौकरी बदलते रहना

  • व्यवसाय में असफलता: व्यवसाय में नुकसान, असफलता

  • आर्थिक संकट: पैसे की कमी, अचानक नुकसान, कर्ज

  • सत्ता के साथ समस्या: बॉस, अधिकारी, या सरकारी मामलों में दिक्कत

  • असफलता की श्रृंखला: एक के बाद एक असफलता​

E. विवाह और संतान संबंधी:

  • विवाह में देरी: विवाह योग्य उम्र में भी विवाह न हो पाना

  • वैवाहिक जीवन में कलह: विवाह के बाद लगातार झगड़े, तलाक की नौबत

  • संतान में समस्या: संतान न होना, बार-बार गर्भपात, कमजोर संतान

  • यौन समस्याएं: नपुंसकता या समान समस्याएं

  • पति-पत्नी में दूरी: भावनात्मक और शारीरिक दूरी​

ग्रहण दोष का विवाह और संतान पर गंभीर प्रभाव

ग्रहण दोष का सबसे कष्टदायक प्रभाव विवाह और संतान पर पड़ता है। विवाह को "संस्कार" माना जाता है—जीवन का एक महत्वपूर्ण अध्याय। लेकिन ग्रहण दोष इस अध्याय को अस्पृश्य कर देता है।​

विवाह पर प्रभाव:

विवाह में देरी: ग्रहण दोष वाले व्यक्ति को विवाह में भारी देरी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो विवाह योग्य उम्र निकल जाती है और विवाह नहीं होता। यह इसलिए होता है कि इस दोष के कारण व्यक्ति की आकर्षण शक्ति कम हो जाती है, और संभावित जीवनसाथी दूर रहते हैं।​

विवाह के बाद में समस्याएं: जब विवाह हो भी जाए, तो जीवन शुरुआत से ही समस्याग्रस्त रहता है। पति-पत्नी के बीच भावनात्मक जुड़ाव नहीं होता। झगड़े, अनबन, और अलगाववाद का माहौल बना रहता है। कई मामलों में तलाक तक नौबत आती है।​

संबंध में कमी: सात्विक विवाह संबंध टिकता नहीं। व्यभिचार, दुर्व्यवहार, और मानसिक प्रताड़ना के मामले सामने आते हैं। दोनों एक-दूसरे को समझ ही नहीं पाते।

संतान पर प्रभाव:

बांझपन: ग्रहण दोष वाले दंपति को संतान की चाहत पूरी नहीं होती। वर्षों तक प्रयास के बाद भी संतान नहीं होती। चिकित्सा विज्ञान भी कोई कारण नहीं निकाल पाता, लेकिन संतान नहीं होती।​

गर्भपात: यदि गर्भ ठहरता भी है, तो बार-बार गर्भपात हो जाता है। 2-3 महीने, 4-5 महीने, 6-7 महीने में गर्भपात कर देता है। यह एक अत्यंत दर्दनाक अनुभव है।

कमजोर संतान: यदि कोई संतान जन्म ले भी जाए, तो वह कमजोर, बीमार, विकलांग, मानसिक रूप से पिछड़ी या दुर्बल होती है। ऐसी संतान माता-पिता के लिए जीवन भर का कष्ट बन जाती है।

आनुवंशिक समस्या: माना जाता है कि ग्रहण दोष की ऊर्जा भ्रूण को गलत तरीके से विकसित करती है, जिससे आनुवंशिक विकार (genetic disorders) का खतरा बना रहता है।​

ग्रहण दोष के प्रभावी और रामबाण उपाय

ग्रहण दोष के उपाय कई स्तरों पर किए जाते हैं—धार्मिक, आध्यात्मिक, और प्रायोगिक। आइए सभी प्रभावी उपायों को विस्तार से समझते हैं।​

A. मंत्र जाप (सबसे प्रभावी घरेलू उपाय)

1. सूर्य ग्रहण दोष के लिए – गायत्री मंत्र (सर्वश्रेष्ठ):
ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यम्
भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।।
  • समय: सुबह सूर्योदय के समय (4-6 AM)

  • संख्या: 108 बार दैनिक (या 1,000 बार अधिक प्रभावी)

  • समय अवधि: 40 दिन न्यूनतम (या आजीवन नियमित)

  • विशेष: हर रविवार को विशेष जाप करें​

2. चंद्र ग्रहण दोष के लिए – चंद्र मंत्र:
ॐ चंद्राय नमः
ॐ सोमाय नमः
  • समय: सोमवार को या संध्या काल में

  • संख्या: 108 बार दैनिक

  • समय अवधि: 40 दिन या नियमित

  • विशेष: पूर्णिमा के दिन विशेष जाप करें​

3. महामृत्युंजय मंत्र (सभी दोषों के लिए सार्वभौमिक):
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
  • यह मंत्र सभी दोषों में, विशेषकर ग्रहण दोष में प्रभावी है

  • संख्या: 108 बार दैनिक (या 1,000 बार)

  • समय: कभी भी, लेकिन प्रातः काल सर्वश्रेष्ठ है

  • अवधि: लाइफटाइम या कम से कम 1 साल​

B. पूजा और धार्मिक कार्य

1. सूर्य पूजा (सूर्य ग्रहण दोष के लिए):
  • समय: सुबह सूर्योदय के समय

  • विधि: ताम्बे या पीतल के पात्र में जल, फूल, और चावल लें, सूर्य की ओर मुंह करके अर्घ्य दें

  • मंत्र: ॐ सूर्याय नमः बोलते हुए अर्घ्य दें

  • अतिरिक्त: रविवार को विशेष पूजा करें, आरती करें​

2. चंद्र पूजा (चंद्र ग्रहण दोष के लिए):
  • समय: संध्या काल में चंद्रमा को नमस्कार करें

  • पूर्णिमा: पूर्णिमा के दिन विशेष पूजन करें

  • अमावस्या: अमावस्या को महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें

  • दूध: चंद्रमा को ताज़ा दूध समर्पित करें​

3. शिव पूजा (राहु-केतु दोष के लिए):
  • समय: प्रतिदिन, विशेषकर सोमवार को

  • विधि: शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद, गंगा जल से अभिषेक करें

  • मंत्र: ॐ नमः शिवाय का जाप करें (108 बार)

  • आरती: शाम को आरती अवश्य करें​

C. दान और सेवा

सूर्य ग्रहण दोष के लिए दान:
  • वस्तु: गेहूं, तांबा, लाल कपड़े, गुड़, घी, शहद

  • समय: रविवार को, सुबह में

  • व्यक्ति: ब्राह्मण, गरीब, या मंदिर को दान करें​

चंद्र ग्रहण दोष के लिए दान:
  • वस्तु: दूध, चावल, सफेद कपड़े, खीर, पायस

  • समय: सोमवार को, सांझ में

  • व्यक्ति: ब्राह्मण या गरीब को​

राहु-केतु दोष के लिए दान:
  • वस्तु: तिल (काले तिल), सरसों का तेल, काली दाल, काले कपड़े

  • समय: शनिवार को, रात में

  • व्यक्ति: दलित या गरीब को​

ग्रहण दोष: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

Q1: क्या ग्रहण दोष आजीवन रहता है?

नहीं, ग्रहण दोष का प्रभाव समय के साथ कम होता है। राहु की महादशा लगभग 18 साल की होती है। उसके बाद प्रभाव कम हो जाता है। लेकिन सही उपाय से इसे जल्दी शांत किया जा सकता है।​

Q2: क्या ग्रहण दोष का अर्थ है विवाह नहीं हो सकता?

नहीं, सही उपाय, संशोधन नियमों, और दान-पुण्य से विवाह किया जा सकता है। लेकिन सावधानियां बरतनी चाहिए।​

Q3: महामृत्युंजय मंत्र का क्या महत्व है?

महामृत्युंजय मंत्र सभी ग्रहीय दोषों, विशेषकर ग्रहण दोष के लिए सार्वभौमिक उपचार है। यह मंत्र मृत्यु को भी टाल सकता है।​

Q4: क्या रत्न धारण अनिवार्य है?

नहीं, रत्न धारण एक सहायक उपाय है। मंत्र, दान, और पूजा भी समान रूप से प्रभावी हैं। लेकिन ज्योतिषी की सलाह से रत्न धारण अवश्य लाभकारी होता है।​

निष्कर्ष: ग्रहण दोष—चिंता का विषय नहीं, सावधानी का विषय है

ग्रहण दोष निश्चित रूप से एक गंभीर दोष है, लेकिन यह असाध्य नहीं है। इतिहास में हजारों लोग ग्रहण दोष के साथ खुशहाल जीवन जीते हैं। महत्वपूर्ण यह है कि दोष को समझा जाए, उचित ज्योतिषी से सलाह ली जाए, और धैर्य के साथ उपाय किए जाएं।

SkillAstro पर हमारे विशेषज्ञ ज्योतिषी आपकी कुंडली का गहन विश्लेषण कर सकते हैं, ग्रहण दोष की गंभीरता निर्धारित कर सकते हैं, और व्यक्तिगत सलाह दे सकते हैं।

याद रखें: "हर अंधकार के बाद प्रकाश होता है। ग्रहण दोष एक अस्थायी छाया है, जो सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक सकती। सही प्रयास से यह छाया हट जाती है।"

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Ajeet Verma 3 January 2026
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