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Raksha Bandhan 2026 Date & Shubh Muhurat: Sahi Samay, Tithi Aur Mahatva

रक्षाबंधन 2026 कब है? जानिए पूर्णिमा तिथि, भद्रा रहित शुभ मुहूर्त, राखी बांधने की सही विधि
21 August 2026 by
Raj Maurya

Raksha Bandhan 2026 Date & Shubh Muhurat: Sahi Samay, Tithi Aur Mahatva | Skill Astro

श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाने वाला रक्षाबंधन केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम, सुरक्षा और आत्मिक समर्पण का सबसे पवित्र पर्व है। रेशम का एक साधारण सा धागा जब बहनों की प्रार्थना और भाइयों के संकल्प से जुड़ता है, तो वह एक ऐसा रक्षा कवच बन जाता है जो हर संकट से रक्षा करता है।

साल 2026 में रक्षाबंधन की सही तारीख, भद्रा काल की स्थिति और राखी बांधने का सबसे फलदायी मुहूर्त क्या है? अगर आप भी इस विषय को लेकर स्पष्टता चाहते हैं, तो यह लेख शास्त्रीय पंचांग गणना के आधार पर आपके सभी संशयों को दूर करेगा।

रक्षाबंधन 2026: तिथि एवं पंचांग गणना

वैदिक पंचांग के अनुसार, रक्षाबंधन का पर्व श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। धर्मशास्त्रों का स्पष्ट नियम है कि यदि पूर्णिमा तिथि पर भद्रा का साया न हो, तभी राखी बांधना शुभ और शास्त्रसम्मत होता है।

पंचांग विवरणसमय एवं तिथि
रक्षाबंधन पर्व तिथि28 अगस्त 2026, दिन शुक्रवार
पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ27 अगस्त 2026, रात्रि 11:15 बजे से
पूर्णिमा तिथि का समापन28 अगस्त 2026, रात्रि 08:40 बजे तक
अपराह्न (दोपहर) शुभ मुहूर्तदोपहर 01:45 बजे से शाम 04:20 बजे तक
प्रदोष काल (संध्या) मुहूर्तशाम 06:45 बजे से रात्रि 08:40 बजे तक
अभिजीत मुहूर्तदोपहर 11:57 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक

ज्योतिषीय परामर्श: 28 अगस्त 2026 को पूरे दिन राखी बांधने के लिए शुभ योग बन रहे हैं, लेकिन दोपहर 01:45 से शाम 04:20 बजे का समय सबसे उत्तम और सर्वार्थ सिद्धिदायक माना गया है।

भद्रा काल में राखी क्यों नहीं बांधनी चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र में भद्रा को सूर्यदेव की पुत्री और शनिदेव की सगी बहन माना गया है। भद्रा का स्वभाव उग्र और विनाशकारी माना जाता है। शास्त्रों में स्पष्ट लिखा है— "भद्रायां द्वे न कर्तव्ये श्रावणी फाल्गुनी तथा" अर्थात भद्रा काल में श्रावणी (रक्षाबंधन) और फाल्गुनी (होलिका दहन) कभी नहीं करना चाहिए।

पौराणिक संदर्भ के अनुसार, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने उसे भद्रा काल में ही रक्षासूत्र बांधा था, जिसके परिणामस्वरूप रावण के पूरे साम्राज्य और कुल का विनाश हो गया।

28 अगस्त 2026 के दिन भद्रा का प्रभाव सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगा, इसलिए बहनें बिना किसी भय या संशय के पूरे दिन अपने भाइयों को रक्षासूत्र बांध सकती हैं।

रक्षाबंधन की प्रामाणिक पूजा विधि

शास्त्रों में वर्णित विधि के अनुसार किया गया रक्षा अनुष्ठान ही पूर्ण पुण्य फल प्रदान करता है:

  1. थाली का श्रृंगार: पूजा की थाली में कुमकुम (रोली), अक्षत (अखंडित चावल), पीली सरसों, चंदन, दीपक, ताजे फूल, मिठाई और राखी रखें।

  2. दिशा का चयन: राखी बंधवाते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। ये दिशाएं देव ऊर्जा और सकारात्मकता का संचार करती हैं। बहन का मुख पश्चिम दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।

  3. सिर ढंकना: भाई और बहन दोनों को पूजा के समय सिर पर रुमाल या दुपट्टा अवश्य रखना चाहिए।

  4. तिलक एवं अक्षत: सबसे पहले भाई के माथे पर कुमकुम और चंदन का तिलक लगाएं। इसके बाद तिलक पर अक्षत लगाएं। ध्यान रखें कि चावल टूटे हुए न हों।

  5. मंत्रोचारण और रक्षासूत्र: भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधते समय तीन गांठें लगाएं। यह तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु और महेश (त्रिदेव) का प्रतीक मानी जाती हैं।

  6. आरती व मिठास: राखी बांधने के पश्चात भाई की आरती उतारें ताकि उन्हें बुरी नजर न लगे। इसके बाद भाई को मिठाई खिलाएं और उनके यशस्वी जीवन की प्रार्थना करें।

राखी बांधते समय इस पौराणिक मंत्र का जप करें

शास्त्रों के अनुसार, रक्षासूत्र बांधते समय इस मंत्र का उच्चारण करने से रक्षासूत्र की शक्ति सौ गुना बढ़ जाती है:

"येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।

तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥"

अर्थ: जिस रक्षासूत्र से अत्यंत शक्तिशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षासूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूँ। हे रक्षासूत्र! तुम स्थिर रहना और भाई की सदैव रक्षा करना।

रक्षाबंधन पर क्या करें और क्या न करें 

  • कैसी राखी चुनें: हमेशा सूती, रेशमी या कलावा से बनी राखी ही चुनें। लाल, पीला, नारंगी या गुलाबी रंग शुभ माना जाता है।

  • इनसे बचें: काले या गहरे नीले रंग की राखी का प्रयोग न करें। अशुभ प्रतीकों (जैसे- प्लास्टिक, क्रास, या खंडित आकृतियों) वाली राखी बांधने से बचें।

  • उपहार का चयन: भाई अपनी बहन को उपहार में तीखी, नुकीली या कांच की वस्तुएं न दें। वस्त्र, आभूषण या धार्मिक पुस्तकें देना अत्यंत शुभ माना जाता है।

पौराणिक कथा: राजा बलि और माता लक्ष्मी

जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर राजा बलि से तीन पग भूमि दान में मांग ली और उन्हें पाताल लोक भेज दिया, तब बलि की भक्ति से प्रसन्न होकर विष्णु जी ने पाताल लोक में ही उनका द्वारपाल बनना स्वीकार कर लिया।

वैकुंठ में भगवान विष्णु के न होने से माता लक्ष्मी चिंतित हो गईं। तब उन्होंने एक गरीब स्त्री का रूप धारण कर राजा बलि को श्रावण पूर्णिमा के दिन रक्षासूत्र बांधा और उन्हें अपना भाई बना लिया। जब राजा बलि ने उपहार मांगने को कहा, तो माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को अपने वास्तविक रूप में मांग लिया। राजा बलि ने अपनी बहन का मान रखते हुए विष्णु जी को सहर्ष विदा किया। तभी से श्रावण पूर्णिमा पर रक्षासूत्र बांधने की यह महान परंपरा चली आ रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न 

प्र 1: क्या 28 अगस्त 2026 को पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है?

उत्तर: हाँ, 28 अगस्त 2026 को भद्रा का साया नहीं रहेगा। पूर्णिमा तिथि रात्रि 08:40 बजे तक है, इसलिए पूरे दिन राखी बांधी जा सकती है।

प्र 2: क्या भाई को बाईं (लेफ्ट) कलाई पर राखी बांधी जा सकती है?

उत्तर: नहीं, शास्त्रों के अनुसार पुरुषों और अविवाहित कन्याओं को हमेशा दाहिने (राइट) हाथ की कलाई पर ही रक्षासूत्र बांधना चाहिए।

प्र 3: अगर राखी खंडित या पुरानी हो जाए तो क्या करें?

उत्तर: पुरानी या टूटी हुई राखी को कभी भी कचरे में न फेंकें। इसे जल में प्रवाहित कर दें या किसी पवित्र पेड़ (जैसे पीपल या बरगद) के नीचे मिट्टी में दबा दें।

प्र 4: क्या बहनें स्वयं को भी रक्षासूत्र बांध सकती हैं?

उत्तर: यदि किसी बहन का भाई न हो, तो वे भगवान श्री कृष्ण, लड्डू गोपाल या अपने इष्टदेव को पहला रक्षासूत्र बांधकर यह पर्व आनंदपूर्वक मना सकती हैं।

रक्षाबंधन केवल एक दिन की परंपरा नहीं, बल्कि जीवन भर एक-दूसरे का सम्मान करने और सुख-दुख में साथ खड़े रहने का पावन वचन है। इस रक्षाबंधन 2026 पर सही विधि और शुभ मुहूर्त का पालन कर अपने पारिवारिक जीवन में शुभता और समृद्धि का आगमन करें।

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