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कार्तिगै दीपम 2025: तारीख, महत्व, अनुष्ठान एवं ज्योतिषीय जानकारी

16 October 2025 by
कार्तिगै दीपम 2025: तारीख, महत्व, अनुष्ठान एवं ज्योतिषीय जानकारी
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कार्तिगै दीपम तमिलनाडु और दक्षिण भारत के कई हिस्सों में बड़े हर्षोल्लास से मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण त्योहार है। यह त्योहार अंधकार पर प्रकाश और अज्ञानता पर ज्ञान की विजय का प्रतीक है। इस पावन पर्व का मुख्य उद्देश्य भगवान शिव और उनके पुत्र भगवान मुरुगन की पूजा करना है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शुद्धि और समृद्धि के आशीर्वाद प्रदान करता है।

2025 के लिए तारीख और समय:

  • कृतिका नक्षत्र प्रारंभ: 3 दिसंबर 2025 को शाम 5:59 बजे
  • कृतिका नक्षत्र समापन: 4 दिसंबर 2025 को दोपहर 2:54 बजे
  • मुख्य त्योहार दिवस: गुरुवार, 4 दिसंबर 2025

कार्तिगै दीपम का महत्व:

कार्तिगै दीपम का अर्थ होता है 'दीपों का त्योहार'। इस दिन हजारों मिट्टी के तेल के दीपक, जिन्हें अगल विलक्कू कहा जाता है, घरों और मंदिरों में जलाए जाते हैं। ये दीपक बुराई और अज्ञान के अंधकार को दूर करने का प्रतीक हैं। अन्नमलाईयर मंदिर, तिरुवन्नामलाई में महा दीपम (विशाल दीपक) जलाना इस पर्व की सबसे बड़ी विशेषता है, जो भगवान शिव के अनंत प्रकाश का प्रतिनिधित्व करता है।

पौराणिक कथाएँ:

  • भगवान शिव ने अपने अनंत अग्नि स्तम्भ रूप में ब्रह्मा और विष्णु को परास्त किया था, जिससे उनकी सर्वोच्चता सिद्ध हुई।
  • भगवान मुरुगन के जन्म की कथा के अनुसार, शिव के छह मुखों से निकली छह दिव्य चिंगारियों से छह देवत्व पैदा हुए, जिन्हें बाद में माता पार्वती ने छह मुखों वाले एक ही बच्चे में परिवर्तित किया।

अनुष्ठान:

  • घरों की सफाई और कोलम (रंगोली) से सजावट।
  • हल्दी-कुंकू लगाए हुए तेल वाले दीयों को अजीब संख्या (5,7,9 आदि) में जलाना।
  • दीपों को पूरी रात जलाए रखना।
  • भगवान शिव और मुरुगन के मंदिरों में जाकर पूजा और स्वास्थ्य, समृद्धि के लिए प्रार्थना।
  • विशेष मंत्र जैसे "शुभं करोति कल्याणं" और "दीपज्योति परब्रह्म" का जाप करना।

ज्योतिषीय महत्व:

यह त्योहार तमिल महीने कार्तिगै के पूर्णिमा दिन आता है, जब चंद्रमा कृतिका नक्षत्र में होता है, जिसके स्वामी देव अग्नि हैं। इस दिन दीपक जलाना नकारात्मक कर्मों को शुद्ध करता है और साहस व आध्यात्मिक परिवर्तन लाता है।

त्योहार अवधि:

कार्तिगै दीपम तीन दिनों तक मनाया जाता है, जिसमें हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है, और अंतिम दिन दीपोत्सव की मुख्य पूजा समापन होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. कार्तिगै दीपम कितने दिनों तक चलता है?

यह त्योहार तीन दिनों तक चलता है, जिसमें पहला दिन भरनी दीपम कहलाता है और अंतिम दिन मुख्य दीपोत्सव होता है।

2. भगवान मुरुगन का कार्तिगै दीपम से क्या संबंध है?

भगवान मुरुगन का जन्म तमिल महीने कार्तिगै में हुआ था, जो इस त्योहार को उनके लिए विशेष बनाता है।

3. कार्तिगै दीपम के लिए प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?

अन्नमलाईयर मंदिर, तिरुवन्नामलाई इस दीपोत्सव के लिए विश्वप्रसिद्ध है।

4. दीपक जलाने का क्या महत्व है?

दीपक किसी भी प्रकार के अंधकार, अज्ञान और नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक हैं।

निष्कर्ष

कार्तिगै दीपम 2025 हमारी ज़िंदगी में प्रकाश, साहस और शांति लेकर आता है। यह प्राचीन त्योहार हमें याद दिलाता है कि अंधकार चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, अंत में प्रकाश की जीत होती है। इस दिव्य प्रकाश से मानव हृदय और मन की गुमराहियों को दूर कर सच्चे ज्ञान की ओर बढ़ावा मिलता है।

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