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मासिक शिवरात्रि व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें

मासिक शिवरात्रि व्रत के दौरान किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है? जानें व्रत के कड़े नियम, वर्जित कार्य और महादेव की कृपा पाने के अचूक तरीके।
16 March 2026 by
Ajeet Verma

मासिक शिवरात्रि व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें | Skill Astro

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मासिक शिवरात्रि व्रत के नियम: क्या करें और क्या न करें

हिंदू धर्म में शिव भक्ति के लिए मासिक शिवरात्रि का दिन अत्यंत पवित्र माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, शिवरात्रि का व्रत जितना फलदायी है, इसके नियम उतने ही कड़े और महत्वपूर्ण हैं। यदि हम भक्ति तो करते हैं लेकिन नियमों की अनदेखी कर देते हैं, तो पूजा का पूर्ण आध्यात्मिक लाभ प्राप्त नहीं हो पाता। महादेव सरल हृदय के हैं, परंतु अनुशासन और शुद्धता उन्हें अत्यंत प्रिय है। यदि आप अपनी कुंडली के ग्रहों को शांत करने और शिव कृपा पाने के लिए यह व्रत कर रहे हैं, तो आपको 'क्या करें' और 'क्या न करें' के बीच का अंतर स्पष्ट होना चाहिए। आइए विस्तार से जानते हैं मासिक शिवरात्रि व्रत के अनिवार्य नियम।

व्रत के दौरान क्या करें 

1. ब्रह्मचर्य का पालन

मासिक शिवरात्रि का व्रत आत्म-संयम का प्रतीक है। इस दिन व्रती को मानसिक और शारीरिक रूप से ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। सात्विक विचार रखें और काम-वासना से दूर रहें।

2. निशिता काल की पूजा

जैसा कि हम जानते हैं, महादेव की पूजा रात्रि के समय (मध्यरात्रि) अधिक प्रभावशाली होती है। इसलिए, रात के समय जागरण करें और शिव चालीसा या 'ॐ नमः शिवाय' का निरंतर जप करें। यह आपके अवचेतन मन को जाग्रत करता है।

3. दान-पुण्य का महत्व

शिवरात्रि पर दान का विशेष महत्व है। किसी जरूरतमंद को सफेद अन्न (चावल), दूध, या वस्त्र दान करें। लाल किताब के अनुसार, गरीबों की सेवा करने से शनि और राहु जैसे क्रूर ग्रहों का प्रभाव कम होता है।

4. शुद्धिकरण और जलाभिषेक

पूजा से पहले स्वयं को शुद्ध करें और महादेव का जलाभिषेक करें। शिवलिंग पर जल की धारा चढ़ाते समय एकाग्रता बनाए रखें।

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व्रत के दौरान क्या न करें 

1. इन चीजों का अर्पण वर्जित है

शिवलिंग पर पूजा के दौरान कुछ चीजें कभी नहीं चढ़ानी चाहिए:

  • तुलसी: महादेव की पूजा में तुलसी वर्जित है।

  • केतकी के फूल: पौराणिक कथा के अनुसार महादेव ने केतकी को अपनी पूजा से त्याग दिया था।

  • सिंदूर या हल्दी: शिव वैरागी हैं और हल्दी/सिंदूर सौभाग्य के प्रतीक माने जाते हैं, इसलिए इन्हें शिवलिंग पर नहीं चढ़ाया जाता।

2. तामसिक भोजन से दूरी

व्रत के दिन तो क्या, शिवरात्रि के अगले दिन पारण तक लहसुन, प्याज, मांस और मदिरा का सेवन बिल्कुल न करें। यह आपकी ऊर्जा को निम्न स्तर पर ले जाता है।

3. क्रोध और विवाद से बचें

शिव शांति के देवता हैं। इस दिन किसी से झगड़ा न करें, अपशब्द न बोलें और न ही किसी का दिल दुखाएं। यदि आप मन में मैल रखकर पूजा करते हैं, तो वह स्वीकार्य नहीं होती।

4. शिवलिंग की पूरी परिक्रमा न करें

याद रखें कि शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती। जहाँ से जल प्रवाहित होता है (जलाधारी), उसे कभी नहीं लांघना चाहिए। हमेशा आधी परिक्रमा (चंद्रमा के आकार की) ही करें।

ग्रहों की शांति के लिए नियमों का चार्ट

कुंडली के दोषों के आधार पर नियमों का पालन करने से विशेष लाभ मिलता है:

दोष / समस्याक्या करें?क्या न करें?
मानसिक तनाव (चंद्र दोष)शिवलिंग पर चंदन लगाएं और रात को दूध अर्पित करें।सफेद वस्तुओं का अपमान न करें।
क्रोध और तनाव (मंगल दोष)महादेव को शहद चढ़ाएं।लाल मिर्च और भारी मसालों का सेवन न करें।
कार्य में बाधा (शनि दोष)शिवजी पर शमी पत्र चढ़ाएं।झूठ न बोलें और किसी निर्धन का हक न मारें।
भय और भ्रम (राहु-केतु)शिवलिंग पर कुश और जल चढ़ाएं।तामसिक भोजन और नशीली वस्तुओं से बचें।

लाल किताब के अनुसार सावधानियां

लाल किताब के प्राचीन ज्ञान के अनुसार, मासिक शिवरात्रि पर निम्नलिखित सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • सावधानी 1: यदि आपका शुक्र कमजोर है, तो फटे हुए कपड़े पहनकर पूजा न करें। साफ-सुथरे और धुले हुए वस्त्र ही पहनें।

  • सावधानी 2: शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद स्वयं न खाएं, उसे किसी अन्य को वितरित कर दें या जल में प्रवाहित कर दें।

  • सावधानी 3: मंदिर में जाकर सफाई का कार्य करें, इससे घर की दरिद्रता दूर होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

क्या मासिक शिवरात्रि व्रत में सोना चाहिए?

दिन के समय सोने से बचना चाहिए। रात्रि में जागरण कर शिव आराधना करना सर्वोत्तम माना गया है। यदि स्वास्थ्य ठीक न हो, तो थोड़ी देर विश्राम किया जा सकता है।

क्या मासिक धर्म (Periods) में महिलाएं यह व्रत रख सकती हैं?

ऐसी स्थिति में महिलाएं व्रत रख सकती हैं और मानसिक जप (मन ही मन नाम लेना) कर सकती हैं, लेकिन उन्हें शिवलिंग का स्पर्श या मंदिर में प्रवेश नहीं करना चाहिए।

व्रत का पारण कब और कैसे करें?

व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के बाद और चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले करना चाहिए। पारण के समय सबसे पहले गंगाजल या शिव का चरणामृत ग्रहण करें, फिर सात्विक भोजन करें।

निष्कर्ष

मासिक शिवरात्रि का व्रत जितना समर्पण मांगता है, उतना ही यह जातक के जीवन को प्रकाशित करता है। "क्या करें और क्या न करें" के इन नियमों का पालन करना न केवल आपकी श्रद्धा को दर्शाता है, बल्कि यह आपके भीतर के अनुशासन को भी जगाता है। जब आप इन सूक्ष्म नियमों का पालन करते हुए महादेव की पूजा करते हैं, तो ब्रह्मांड की सकारात्मक शक्तियां आपके साथ जुड़ने लगती हैं। आगामी मासिक शिवरात्रि पर इन नियमों को ध्यान में रखें और महादेव का पूर्ण आशीर्वाद प्राप्त करें।

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Ajeet Verma 16 March 2026
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